पौराणिक गाँव गैलंड. (गैं), ग्राम- सेला

इतिहास कथा
नरेन्द्र ‘न्यौला पंचाचूली’
शताब्दियों पहले ग्राम- सेला के स्येला मण्डम नदी के दायें छोर पर पौराणिक गाँव- गैलंड. नामक स्थान पर ग्राम बौन के राठ- बुंड.स्येला बौनालों के पितृ पूर्वज जन निवास करते थे, वे इस गैलंड. नामक क्षेत्र के मूल निवासी थे और और वर्तमान उत्तराधिकारी वे ही माने जाते हैं। इन बौनालों को बुंड.स्येला उपजाति नाम से भी सम्बोधित करते हैं। सदियों पूर्व ग्राम सेला का यह गैलंड. नामक स्थान में वीरान पड़े गाँव के मकानों के खण्डित अवशेष, मकानों के प्रवेश द्वार चैखटें, चिकनी मिट्टी का बर्तनों के साक्ष्य प्रमाण स्वरूप अभी भी मिलते रहते हैं। इस सुन्दर पौराणिक गाँव गैलंड. नामक क्षेत्र के चैड़े-चैड़े खेत के निशान, खेतों के बीच मैदानी भू-भाग, भू विभाजक पत्थरों के चिन्ह, गाँव के खड़न्जे एवं किराने किनारे खड़े किये गये उँचे-उँचे बड़े पत्थरों का बाड़ा, अनाज कूटने पीसने का जन्नदी (पत्थर का हाथ चक्की) और विशाल पत्थर पर बना पाला (ओखली), जानवरों को पानी पिलाने का कुलो, देव चिन्हित स्थल और गाँव का पंचायती चैथरा थं (चबूतरा) ऐसा आभास करता है मानो अभी-अभी कुछ समय पूर्व ही पंचायत से उठाकर लोग अपने-अपने घरों को चले गये हों, साथ ही इन साक्ष्यों को देखकर ऐसा लगता है मानो कुछ सदी पूर्व ही गैलंघ ग्रामवासियों ने यहाँ से पलायन किया हो।
सेला पौराणिक गाँव गैलंड. की प्राकृतिक, कृषि व व्यवसायिक सम्पदा के रूप में काफी समृद्ध था परन्तु यहाँ रहने वाले लोगों में बार-बार एक ही चीज की कसक थी कि गाँव पहाड़ से सटकर बसे होने के कारण दिन में सूर्य उदय की किरणें देर से पहुंचती है व शाम में सूर्य अस्त की किरणें जल्दी छुप जाती है (यानि सूरज की किरणें दिन में बहुत थोड़े समय तक के लिये ही पहुंच पाती थी)। सूरज की किरणें मानव व फसली जीवन के लिये अति महत्वपूर्ण होता है। यह गाँव ‘पहाड़ सूरज की किरणें’ गैलंड. सेलाल जनों के पलायन का कारण था, ऐसा दारमा रं जन और बुंड.स्येला जन कहते हैं। एक दिन गैलंड. सेलाल जनों ने इस समस्या का समाधान हेतु आपसी विचार विमर्श कर पंचायत का आयोजन किया, आगे भविष्य में गाँव तक सूरज की किरणें पहुंचने में रुकावट न हो करके इस रुकावट पैदा करने वाले पहाड़ को काटने का निर्णय लिया। प्राचीन काल में कोई भी ग्रामजन व बाहुबली जन जब भी किसी विशेष कार्य को करते थे, उस कार्य को प्रण लेकर करते थे और दूसरे क्षेत्र जनों के लिए एक उदाहरण सिद्ध करते थे। यह पहाड़ कटान का कार्य भी गैलंघ ग्राम जनों ने प्रण लेकर किया, प्रण लिया यदि हम एक ही रात में भोर सवेर से पहले इस पहाड़ को काट सके तो यहीं रहेंगे अन्यथा इस मातृ भूमि को छोड़कर कहीं और प्रवास पर चले जायेंगे।
(यह बात उस प्राचीन त्य वचन समय की है जब लोग अपने वचनों का सौ प्रतिशत मान रख उस वचनों पर अडिग रहते थे और मानव, वनस्पति व पशु पक्षियों की आपस की परेशानी को समझते हैं, साथ ही उस युग में वर्तमान का नौ दिन-एक दिन और वर्तमान नौ रात-एक रात के बराबर माना जाता था।)
पौराणिक गाँव-गैं ‘गैलंड.’ ग्रामजनों ने विशेष चाँदनी रात का दिन निश्चित कर ग्राम विधिवत पूजा-पाठ किया और भूमि-पूजन कर ग्राम जन अपने-अपने गैन्थी, फावड़ा, छैनी, साम्बल, घन और अन्य हथियारों को लेकर बलशाली ग्राम योद्धा युवक उस पहाड़ को काटने निकले, गाँव के बाहुबल योद्धा युवक दल ने पहाड़ का मध्य-निचली तल भाग को गुफानुमा काट-काटकर दोपहर तक गिराने की बहुत कोशिश की पर पहाड़ का चट्टान ठोस पत्थरों के होने के कारण योजना मुताबिक यह पहाड़ नहीं गिरा पाए। फिर दुबारे इसी दल ने पहाड़ के उच्च सिरा भाग से इस चट्टान का कटान करना शुरु किया। चट्टान काटते- काटते, तोड़ते-तोड़ते पहाड़ की चोटी को लगभग आध तक काट दिया पर समय बीतता जा रहा था। समय बीतते- बीतते तड़के बोर सवेर हो जाने के कारण उन्होंने उस कार्य को वहीं रोक दिया, वे उस पहाड़ को पूर्ण तोड़ नहीं पाये। बुंघ स्येला पितृ पूर्वज जनों के द्वारा उस प्राचीन समय पर तोड़े गये पहाड़ के टुकड़े और हथियारों के निशान के साक्ष्य वर्तमान समय पर भी साफ-साफ दिखाई देते हैं। पहाड़ के मध्य निचला तल भाग के जिस जगह पर चट्टान कटान का कार्य किया गया था, उस जगह पर वह पहाड़ इतना बड़ा गुफानुमा कटान हुआ है, जिस पर अनेकों लगभग 100-150 लोग एकत्रित हो सकते हैं। बाद में गैलंघ स्येला जनों ने उस पहाड़ को योजना मुताबिक नहीं तोड़ पाने के कारण वर्तमान बौनाल राठ- ‘ बुंड.स्येला ’ के पितृ पूर्वज जनों ने प्रण के मुताबिक गैलंघ गाँव से पलायन करने का निर्णय किया।
बुंड.स्येला पितृ पूर्वजों का पलायन करते समय पास के ग्राम-वर्तमान स्येला वासियों के पितृ पूर्वजों ने काफी समझाया पर वे उनकी बात को नहीं माने। अपने प्रण के मुताबिक अपनी वर्तमान जन्म- कर्म भूमि को छोड़कर वे वहाँ से चलते चलते वर्तमान बौंन गाँव पर जाकर बस गए, आजकल उन्हें ग्राम-बौंन, का बौनाल बुंड.स्येला राठ जन कहते हैं। यह ग्राम बौंन, राठ बुंड.स्येला, सेला ह्या गुरु गैलंड. देव को अपना ईष्ट देव मानते हैं।

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