सम्पादकीय

11-03-2026 Posted by: सम्पादक (पिघलता हिमालय)

बसाने और उजाड़ने का खेल बन्द कर हकीकत को जानो

हल्द्वानी में रेलवे की भूमि को लेकर लम्बे समय से चल रहे विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट ने रास्ता दिखाते हुए कह दिया कि रेलवे की विस्तार और विकास परियोजनाओं के मद्देनजर सार्वजनिक भूमि पर बसे लोगों जगह खाली करनी होगी। सरकार की पुनर्वास नीति के तहत वहाँ जाना होगा जहाँ उनको जगह या घर मुहैया कराया जाएगा। शीर्ष अदालत ने फैसले में उत्तराखण्ड हाईकोर्ट के दिसम्बर 2022 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आदेश दिया कि सार्वजनिक जमीन पर कथित तौर पर अवैध कब्जा कर कई वर्षों से रह रहे हजारों परिवारों को हटना होगा। आदेश के बाद यह तो साफ हो चुका है कि वनभूलपुरा में रेलवे के साथ ही राज्य सरकार की करी ...

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रेलवे सुरक्षा बल ने पूरे रेलवे क्षेत्र की सुरक्षा बढ़ा दी है

11-03-2026 Posted by: सम्पादक (पिघलता हिमालय)

हल्द्वानी। वनभूलपुरा में राज्य सरकार व रेलवे की भूमि पर अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सुरक्षा व्यवस्था के लिये जवान चौकन्ने हैं। रेलवे सुरक्षा बल आरपीएफ ने पूरे रेलवे क्षेत्र की सुरक्षा बढ़ा दी है। अतिक्रमण हटने व पुनर्वास की प्रक्रिया के समय यूपी से भी आरपीएफ के जवान बुलाने की तैयारी है। पूर्वोत्तर रेलवे इज्जतनगर माण्डल के अन्तर्गत आने वाले हल्द्वानी रेलवे स्टेशन से लगे बनभूलपुरा क्षेत्र पर अतिक्रमण हटाना प्रशासन के लिये बड़ी चुनौती है। इसके लिये आरपीएफ द्वारा प्रारम्भिक स्तर पर तैयारी की गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तो साफ ही है कि 31 मार्च तक जिला प्रशासन को यहाँ पात्रता के दायरे में आने वाले लोगों को पीएम आवास योजना से जोड़ने के निर्देश दे दिये गये हैं। पुलिस की ओर से भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तैयारियां की जा रह ...

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त्यौहार दिखावे की भेंट चढ़ गया

11-03-2026 Posted by: सम्पादक (पिघलता हिमालय)

होली का त्यौहार निपट चुका है और ग्रीष्म होने लगी है। साथ ही ले-देकर विधानसभा चुनाव 2027 की ओर ध्यान लगाया जा रहा है। होली-2026 की पड़ताल करें तो पूरे उत्तराखण्ड में धूम तो अपनी जगह थी लेकिन पूरा त्यौहार दिखावे की भेंट चढ़ गया। चुनराव की तेयारी में जुटे नेता अपने-अपने तीर चलाते हुए बेलगाम दिखाई दिये। पिछले कुछ वर्षों से जिस प्रकार का प्रचलन बढ़ता जा रहा है कि कोई भी त्यौहार को अपने प्रचार का साधन बनाने वाले नेता और छुटभैये अपनी घेराबाड़ी करने लगे हैं। अपने प्रचार के लिये कलाकारों की भीड़ भी बुलाई जाती है ताकि वह उनके मुताबिक गीत गाकर जैजैकार करें। इन सबके बीच उमंग से ज्यादा दिखावे का जुनून सर चढ़ चुका है। कहने को तो होली के महादंगल से हो रहे थे लेकिन इनकी सच्चाई यही है कि किसी प्रकार आयोजन सम्पन्न हों। चूंकि असल गायक-वादक गिनती भर के हैं और पलायन से ...

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