सम्पादकीय
उपलब्धि के गीत और सरकार
📅 27 April 2026
✍️ पिघलता हिमालय
उत्तराखण्ड सरकार इन दिनों में ‘उपलब्धि के चार साल बेमिशाल’ बताते हुए अपनी प्रशंसा कर अपनी ही पीठ थपथपा रही है। चुनाव से पहले बचे एक साल में जिस प्रकार का भरपूर शो प्रदेश में होने जा रहा है उसकी सच्चाई समझ आ रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी कह रहे हैं- ‘ये चार साल केवल उपलब्धियां नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव की सियासी रणनीति भी शामिल थी। विकास और विचार दोनों के संगम है।’ दूसरी ओर विपक्ष की ओर से नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य कहते हैं- ‘सरकार के चार साल पूरे होने पर वह अपना श्वेतपत्र जारी करे। प्रदेश की वास्तविक स्थिति भी जनता के सामने रखनी चाहिए।’
सरकार चाहे कोई हो, किसी की भी, वह उपलब्धि भरी ही होनी चाहिये। उपलब्धियों के मानक क्या हों इस पर सार्थक बहस हो। उपलब्धि केवल अपने पार्टी के झण्डे-डण्डे-बैनर उठाने वाले, अपने कार्यकर्ता, अपने पसन्द के ठेकेदार, अपने ही कार्य नहीं होते हैं। उपलब्धि
सरकार चाहे कोई हो, किसी की भी, वह उपलब्धि भरी ही होनी चाहिये। उपलब्धियों के मानक क्या हों इस पर सार्थक बहस हो। उपलब्धि केवल अपने पार्टी के झण्डे-डण्डे-बैनर उठाने वाले, अपने कार्यकर्ता, अपने पसन्द के ठेकेदार, अपने ही कार्य नहीं होते हैं। उपलब्धि