गुण्डागर्दी और भ्रष्टाचार
उच्चशिक्षा की जड़ में जाएं तो पता चलता है कि गलती दोनों ओर से होती रही है। इतना जरूर है कि पहले गुरु का मान रखते हुए छात्र शान्त हो जाते थे और गुरु जी भी सुलझी बात करते थे परन्तु समय के साथ अशान्ति बढ़ती जा रही है। शिक्षा के नाम पर कितनी पढ़ाई हो रही है, मोटी पगार लेने वाले अपने कार्य के प्रति कितना ईमानदार हैं, विभिन्न मदों में आई राशि का किस प्रकार से व्यय होता है, ऐसी सारी बातों को लेकर आजकल बच्चे चौकन्ने हैं। यही कारण है कि वह मौका देखते ही भ्रष्टाचार की पूंछ पकड़ना चाहते हैं। कहीं पर कुछ गड़बड़ मिली तो आन्दोलन होना ही है। इस प्रकार के कई किस्से हो चुके हैं जब भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए, छेड़छाड़ का