सम्पादकीय

मातृशक्ति का कैसा सम्मान

📅 07 May 2026 ✍️ पिघलता हिमालय
इन दिनों में देश में ‘नारी शक्ति वन्दन संविधन संशोधन विधेयक’ को पारित न होने के बाद पक्ष-विपक्ष अपने-अपने तरीके से एक-दूसरे को आरोपित कर रहे हैं। कहते हैं- ‘इनके कारण महिलाओं का आरक्षण नहीं मिल पाया।’ सदन में क्या हुआ, किसने क्या कहा, कितना बहुमत था- सबको सब पता है। फिर कितने ही विधेयक पास होने हैं और कुछ नहीं हो पाते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि उसे सड़क-चौराहे पर नारेबाजी करते हुए अपने पद की गरिमा को भूल जाएं।
इसी मामले को लेकर उत्तराखण्ड में भी राजनीति हो रही है। भाजपा की ओर से मशाल जुलूस सहित तमाम आयोजन हो चुके हैं जिसमें कहा जा रहा है कि महिला आरक्षण बिल गिराने में विपक्ष का हाथ है।
साझा करें: Facebook Twitter WhatsApp

📰 संबंधित समाचार

सम्पादकीय

पर्यटन के साथ-साथ शालीनता भी जरूरी है

जिसको देखो, उत्तराखण्ड में पर्यटन विकास की बात करने लगता है और यह सुनकर मन को सकून मिलता है कि लाखों लोग देवभूमि के दर्शन को आएंगे, स्वरोजगार की बाढ़ आ...

📅 30 Apr 2026 पढ़ें →
सम्पादकीय

लोकपर्वों का हवाई उत्सव

उत्तराखण्ड का लोकपर्व फूलदेई को लेकर देश के प्रमुख उद्योगपति महेन्द्रा ग्रुप के चैयरमैन आनन्द महेन्द्रा बहुत प्रभावित हैं। सोशल साइट एक्स पर वह लिखते ...

📅 27 Apr 2026 पढ़ें →
सम्पादकीय

उपलब्धि के गीत और सरकार

उत्तराखण्ड सरकार इन दिनों में ‘उपलब्धि के चार साल बेमिशाल’ बताते हुए अपनी प्रशंसा कर अपनी ही पीठ थपथपा रही है। चुनाव से पहले बचे एक साल में जिस प्रकार...

📅 27 Apr 2026 पढ़ें →