उत्सव-त्यौहार केवल प्रदर्शन नहीं हैं
चल रहे दौर में उत्सव-त्यौहार के अलावा गढ़ दिये गये आयोजनों की भरमार है और इन सबके पीछे मुंहसुख और प्रदर्शन/दिखावा है। यह भी मान लिया गया है कि इस प्रकार के प्रदर्शन से युवा अपनी जड़ों से जुड़ जाएंगे और संस्कृति भी बनी रहेगी। जबकि सच्चाई यह है कि अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिये समय की रफतार के अलावा अपने बुजुर्गोें द्वा