सम्पादकीय

उत्सव-त्यौहार केवल प्रदर्शन नहीं हैं

📅 07 November 2026 ✍️ पिघलता हिमालय
दीपों का त्यौहार चहुं ओर खुशियां भर दे। सुख-समृद्धि की कामना करते हुए दीपावली का त्यौहार सबको उमंगित करने वाला हो। इसके अलावा भी त्यौहारों के पीछे मूल भाव अपने समाज को जोड़ने, एक-दूसरे का सहयोगी बनने, अपनी परम्पराओं को संजोए रखना ही है। हमारे उत्सव-त्यौहार को इसी कारण धार्मिक आस्था से भी जोड़कर रखा गया है ताकि किसी प्रकार की मनमानी न हो परन्तु अति हायतौबा के इस दौर में उत्सव-त्यौहार को प्रदर्शन सा मान लेने वालों ने इसके मूल को भुला दिया है। इन उत्सवों का उत्साह तब दुगुना होता है जब हम किसी कमजोर की सहायता करते हैं और उन्हें आगे बढ़ने में मदद करते हैं।
चल रहे दौर में उत्सव-त्यौहार के अलावा गढ़ दिये गये आयोजनों की भरमार है और इन सबके पीछे मुंहसुख और प्रदर्शन/दिखावा है। यह भी मान लिया गया है कि इस प्रकार के प्रदर्शन से युवा अपनी जड़ों से जुड़ जाएंगे और संस्कृति भी बनी रहेगी। जबकि सच्चाई यह है कि अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिये समय की रफतार के अलावा अपने बुजुर्गोें द्वा
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