चंद राजाओं के वीरों के ग्राम करक्यूड़ा को अब खर्ककार्की के नाम से जानते हैं

गाँव का पुराना नौला

पि.हि.प्रतिनिधि
चम्पावत जिले के मुख्यालय से लगे गाँव खर्ककार्की में अब कंक्रीट का जंगल विस्तार लेने लगा है। करक्यूड़ा नाम के इस ग्राम को खर्ककार्की नाम से जाना जाता है। कार्कियों के परिवार यहाँ बहुतायत से हैं। दरअसल चंद शासक के समय कार्की उनके वीरों में सम्मलित थे। चंद शासनकाल में उनके चार बड़े मंत्रियों में कार्की, चैधरी, तड़ागी, बोरा थे। आज भी चम्पावत में चार भागों में इनकी बसासत है। कार्की आल, चैकुनी आल, बोरा आल, चैधयाली। संग्राम कार्की नाम इतिहास में है जो पराक्रमी योद्धा के रूप में जाने जाते हैं।
खर्ककार्की से कई स्थानों पर कार्की परिवार जाकर बसे। इनमें से पुंगराउ घाटी में भी यह बसे। इसी गाँव में शक्टा परिवार इनके आचार्यों के रूप में स्थापित हैं। संस्कृत के विद्वानों शक्टा परिवार आज भी स्वाध्याय व अपने संस्कारों के साथ सामाजिक भागीदारी में संलग्न हैं।
खर्ककार्की गाँव आलू की खेती के लिये भी प्रसिद्ध रहा है लेकिन आजकल सुअरों के आतंक से खेतों को नुकसान होने के कारण क्षेत्रवासी परेशान हैं। गाँव में आज भी पुराने भवन दिखाई देते हैं लेकिन अब अधिकतर सीमेंट-गारे के बनने लगे हैं। पुराने नौलों को भी सौन्दर्यीकरण के सजाया गया है।
चम्पावत मुख्यालय से लगे इस गाँव से कई परिवार अब बाहर जा चुके हैं लेकिन फिर भी उम्मीद है कि कई लोग लौटेंगे। अपने समृ( इतिहास का स्मरण करते हुए अपनी जड़ों को टटोलते हुए वापसी करेंगे। आने जिस प्रकार चम्पावत मुख्यालय फैलता जा रहा है उस अनुपात में खर्ककार्की भी घिरता जायेगा। इसलिये भी जरूरी है यादों को सहेजा जाए।

पिघलता हिमालय 12 फरवरी 2018 अंक से

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