हल्द्वानी: आज नहीं तो कल बदल ही जाना है शहर का चेहरा

पिघलता हिमालय प्रतिनिधि
हल्द्वानी महानगर बनने के साथ ही तेजी से बदलने लगा है। जन दबाव के कारण यहाँ की सड़कें जाम होने लगी हैं, गलियों में निकलने में दिक्कत हो रही है, नालियां बजबजा रही हैं, कूड़ा निस्तारण समस्या बन चुका है, सीवर लाइन के लिये हुई खुदाई के बाद से काम लटका हुआ है, परिसीमन के बाद शहर में जुड़ चुके ग्रामों में सुविधएं जुटाना है। इसके अलावा अनियोजित निर्माण कार्यों व मुख्य शहर में मनमानी करने वालों के कारण भारी दिक्कत है। समस्याओं से भरे शहर को हर कोई कहता है परन्तु व्यवहार में होता कुछ और है। आश्चर्य की बात नहीं अपनी दुकान या मकान के आगे सड़क में ठेला खड़ा करने वालों से भी कोई किराया वसूल ले। बताया जाता है कि सड़क फुटपाथ पर दुकान सजाने के लिये भी भारी दादागिरी चलती है। किसी को किसी का तो किसी को किसी दूसरे का संरक्षण मिलता है।
नशे की गिरफ्रत में नई पीढ़ी दिखाई दे रही है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अवैध् रूप से संचालित हुक्का वारों को बन्द करवाया है इसके बावजूद किशोर युवक-युवतियां नित नये अड्डे तलाशते दिखाई देते हैं। बताया जा रहा है कि पार्टी में मिलने के बहाने कुछ जमा हो जाते हैं और नशे में डूबने लगते हैं। गाँव की संस्कृति से शहर और शहर से महानगर की ऐसी संस्कृति बहुत भयावह दिखाई दे रही है।
फैलते जा रहे शहर में खेतों का सफाया हो चुका है। बाजार बढ़ता जा रहा है। खिलौनों से लेकर शराब के कारोबार तक के लोग फैल चुके हैं। नेताओं के चेहरे भी बढ़ते जा रहे हैं। बिजली के खम्बों या इधर उधर नित लगने वाले होर्डिंगों से पता चलता है कि कौन-कौन माननीय कहलाने लगे हैं और कौन-कौन उभरते नेता हैं। इन्हें पोषित करने वाले भी चर्चा में रहते हैं।
शहर के फैलने और चैड़े होने में उन पुराने शहरी को ढूंढना मुश्किल होता जा रहा है जो कभी मुख्य थे। क्योंकि उनके आस-पास कई मंजिलों वाले खड़े हो चुके हैं, कारोबार दूसरे हो चुके हैं, समस्याएं अन्य प्रकार की हैं, वह वैसे ही हैं जैसे हुआ करते थे। रबड़ी मलाई, कुल्फी, पान, चाय की पुरानी दुकानें अपनी परम्परा को ढो रही हैं लेकिन चमचमाते व्यापार में जो दिखाई दे रहा है, वहाँ भीड़ है। सुविधएं बढ़ी हैं लेकिन आपफत बढ़ती जा रही है।
शहर के फैलते ही मुख्य समस्या शहर में निकलना मुश्किल हो चुका है। अब इसे सुधर के लिये डण्डे के बल पर काम चलाना मजबूरी लग रहा है। इसके लिये सबसे पहले कालाढूंगी रोड स्थित मुखानी चैराहे को चुना गया है। यहाँ प्रस्तावित फ्रलाईओवर के लिये तैयारी करनी है। इससे पहले चैराहे से दोनों ओर अतिक्रमण हटने हैं। इस जिद्दी शहर में अपने आप से कोई अतिक्रमण हटाने वाला नहीं है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुलिस और प्रशासन ने जब कार्रवाई की तो पक्के निर्माण कार्य टूटते दिखाई दिये। मुखानी चैराहे पर वर्षों से बसे लोगों का तर्क है कि वह अपनी भूमि पर सालों से रह रहे हैं ऐसे में उन्हें न छेड़ा जाए। प्रशासन ने कोर्ट के निर्देश और अध्किारियों के आदेश का हवाला देते हुए जेसीबी के साथ धुंआधार कर दी। अब सवाल है कि अतिव्यस्त कालाढूंगी रोड में क्या मुखानी चैराहे पर ही अतिक्रमण हटेगा या पूरी सड़क पर नाली-नाले व फुटपाथ में मकान-दुकान बना चुके लोगों से भी सवाल किया जायेगा? प्रशासन की ओर से संकेत मिले हैं कि आने वाले दिनों में कोई नहीं छूटेगा। किसी भी प्रकार का अतिक्रमण हटना ही है।
ऐसे में, हे हल्द्वानी वासियो! अभी से तैयारी कर लो। आज नहीं तो कल बदल ही जाना है शहर का चेहरा। कहीं फ्रलाईओवर बनेगा, कहीं पार्क, कहीं काम्प्लेक्स बनेंगे, कहीं कुछ दूसरी चीज। फिलहाल मुखानी चैराहे पर दो दर्जन पक्के मकानों को जेसीबी ने ढहाया है जबकि कई लोग खतरा देख स्वयं से अतिक्रमण तोड़ने लगे हैं। कार्रवाई के दौरान एडीएम हरबीर सिंह, नगर आयुक्त चन्द्र सिंह मर्तोलिया सहा.नगर आयुक्त विजेन्द्र चैहान सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।