पंचायतीराज एक्ट पर बहस, जगह-जगह प्रदर्शन

नियम प्रधानों के लिये क्यों?

कार्यालय प्रतिनिधि
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव सामने है और उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रस्तुत किये गये पंचायतीराज एक्ट पर आम और खास के बीच बहस जारी है। विरोध् तेज होता देख पंचायतीराज संशोधन बिल 2019 विधनसभा की ओर से राज्यपाल को भेजा गया। राज्यपाल बेबीरानी मौर्य को बिल प्रेषित करने के साथ ही विधनसभा का सत्रावसान भी हुआ। सरकार अपना तर्क रखती रही है और जनसंख्या नियंत्रण और शिक्षा की दृष्टि से इसे महत्वपूर्ण बताया गया परन्तु इस नियम को केवल पंचायत व्यवस्था पर लागू करने का विरोध् होने लगा है। यहाँ तक की इसे जल्दबाजी में लिया गया फैसला बताया जा रहा है। कई जगह प्रदर्शन भी हुए हैं। देहरादून में इस बिल के विरोध् में पंचायत जन अध्किार रक्षा मंच नाम से अस्तित्व में आये नये संगठन ने महामहीम राज्यपाल से अपील की है कि उक्त संशोधन बिल पर हस्ताक्षर न करें और इसे पुर्नर्विचार के लिये सरकार को लोटा दें। कहा कि यदि बात नहीं बनी तो हाईकोर्ट जाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं होगा। कांग्रेस इस आन्दोलन के मौके पर जुटी हुई है और भाजपा रास्ते तलाश रही है। एक्ट में किए गए संशोधन के खिलाफ प्रधन संगठन ने मोर्चा खोल दिया है।प्रधानों ने संशोधन को जन प्रतिनिधि विरोधी बताते हुए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ने की चेतावनी दी है। इस सम्बन्ध् में राज्यपाल को ज्ञापन भी प्रेषित किया गया।
शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक कहते हैं कि कांग्रेस का विरोध् पूर्वाग्रह से ग्रसित है। जिस वक्त सदन में यह बिल पारित हो रहा था कांग्रेस ने हंगामा किया जबकि बेहतर होता वह संशोधन की मांग करते। यदि वाकेई कोई खामी रह गई है तो उसे दूर कर लेंगे। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट का कहना है कि सरकार ने पंचायत में सुधर के लिये बड़ा कदम उठाया है। देर-सवेर विधनसभा और लोकसभा में भी यह व्यवस्था होनी है। यदि कोई खामी है तो दूर होगी।
पूर्व मुख्यमंत्राी हरीश रावत ने पंचायती राज एक्ट में हुए संशोधन को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा पर निशाना साध है। हरदा कहते हैं- बड़े-बड़े मंत्री फर्जी डिग्री वाले हैं, लेकिन प्रधनों से डिग्री की मांग हो रही है। उन्होंने कहा है कि व्यवहारिकता को ध्यान में रखकर फैसला होना चाहिये। हाईस्कूल की बाध्यता से सभासद नहीं मिलेंगे। पंचायत एक्ट में तीन बच्चों पर चुनाव रोक व शिक्षा की सीमा का प्रावधन राजनीति से प्रेरित है। यदि सरकार को यही सब करना थ तो डेढ़ वर्ष पहले करना चाहिये था।
चम्पावत में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष उत्तम देव की अगुवाई में जुलूस निकालते हुए सीएम का पुतला फूंका। पूर्व विधयक होमेश खर्कवाल ने कहा कि प्रदेश सरकार ने आनन-पफानन में इस एक्ट को पारित कर दिया है। इसमें दो बच्चों के प्रावधन का खुलासा होना चाहिये और यह कब से लागू हो यह तय होना जरूरी है। नहीं तो ऐसे कई दावेदार जिनकी तीसरी औलाद होने वाली है, वह भू्रण हत्या का शिकार हो सकती है। उनका कहना है कि केवल पंचायत में यह एक्ट लागू करना सियासत का षड़यंत्र है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।
अल्मोड़ा में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने खुलकर अपनी भड़ास निकाली और लोकसभा चुनाव की हार पर चिन्ता जाहिर की। साथ ही पंचायत चुनाव से पहले पंचायती राज एक्ट के फार्मूले पर प्रदेश सरकार की आलोचना की। बैठक में हरीश रावत और डाॅ.इन्दिरा हृदयेश ने सभी से एकजुटता की अपील की ताकि पंचायत और आगामी विधनसभा चुनाव में बाजी मार सकें।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह का कहना है कि सरकार आधी-आधूरी तैयारी के साथ पंचायत राज संशोधन बिल लाई। इसमें उठ रहे सवालों का कोई जबाब सरकार के पास नहीं है। सबसे बड़ी कमी दो बच्चों की शर्त पर कट आॅफ डेट का न होना है।
हल्द्वानी में प्रदेश प्रधान संगठन की बैठक में पंचायत राज एक्ट में किए गए संशोधन को राज्य सरकार द्वारा जल्दबाजी में लिया गया निर्णय बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि सरकार प्रदेश में पहले शिक्षा का स्तर ठीक करे तब इस तरह के अध्यादेश जारी करे। देहरादून में हुई संगठन की बैठक में प्रधन संगठन ने इस एक्ट पर आपत्ति दर्ज की है। जिलाध्यक्ष कुन्दन सिंह बोहरा ने कहा कि कई पंचायतों में पांचवी तक शिक्षा प्राप्त करने के लिए विद्यालय तक नहीं हैं। संगठन के प्रदेश महामंत्री रितेश जोशी ने कहा कि पंचायत चुनाव लड़ने के लिये शिक्षा को जरूरी करने, दो बच्चों वाला अधिनियम शिक्षा के स्तर में गुणात्मक सुधर करने तक कारगर नहीं हो सकता। उन्होंने विध्ेयक पर संशोधन करने की मांग की।
लोहाघाट में भी एक्ट में संशोधन से त्रिस्तरीय चुनाव में अयोग्य घोषित करने के राज्य सरकार के फैसले का विरोध् करते हुए प्रदर्शन हुआ है। एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए पूर्व की तरह पंचायती चुनाव करवाने की मांग की गई। ग्राम प्रधान संगठन के ब्लाक अध्यक्ष चाँद सिंह बोहरा के नेतृत्व में प्रधनों ने एसडीएम को ज्ञापन देकर कहा कि राज्य सरकार ने पंचायतीराज एक्ट में किए संशोधन में त्रिस्तरीय चुनाव में प्रत्याशी को दो बच्चों की सीमा रखी है, जो न्यायसंगत नहीं है। जब कोई एक्ट पास होता है तो उसकी समय सीमा तय होती है। पिथौराढ़ में भी विरोध् प्रदर्शन हुआ। विभिन्न संगठनों ने डीएम कार्यालय पहँुचर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। किसान संगठन के अध्यक्ष सुनील जोशी ने कहा कि देश की संसद अनपढ़ और कम पढ़े-खिले नेता चला रहे हैं। इस नियमों को पहले विधनसभा और संसद में लगाया जाए। कनालीछीना में ग्राम प्रधन संगठन के ब्लाक अध्यक्ष जानकी उपाध्याय के नेतृत्व में बैठक हुई। जिसमें सरकार को चेतावनी दी गई। परिणाम चाहे जो हो, पंचायतीराज संशोधन बिल से सरकार की किरकिरी खूब हुई है।

फुस्स एच.एम.टी.

अपनी-अपनी जमीन नपाई कर रहे हैं विभाग, कर्मी परेशान

कार्यालय प्रतिनिधि
हल्द्वानी। कभी रोजगार के बड़े सपने के साथ शुरु हुआ एचएमटी घड़ी कारखाना रानीबाग फुस्स हो चुका है। इसकी बन्दी को लेकर लम्बे समय से तैयारी चल रही थी लेकिन एनडी तिवारी समेत तमाम नेताओं के दबाव में इसे पाल रखा था। कर्मचारी यूनियन के आन्दोलनों और नेताओं के आश्वासन के बाद धीरे-धीरे कर्मी भी टूटते गये और लगभग सौ कर्मचारी ही इसकी टूटी बिल्डिंगों में डेरा डाले हुए हैं। उजाड़ दिखाई दे रही एचएमटी कालौनी को देख हर कोई उदास होगा क्योंकि जिन अरमानों के साथ एकमुक्त भूमि में इतना बड़ा कैम्पस बनाया गया था, उसका हाल खराब है। कुछ भवन तो धरासायी होने की स्थिति में हैं। ऐसे में स्टाफ क्वार्टर में रह रहे परिवार काफी परेशान हैं। बताया जा रहा है कि एचएमटी प्रबन्धन उनका पीएपफ सैलरी का मार्च तक का हिसाब नहीं कर रहा है। बेंगलुरु स्थित एचएमटी प्रबन्धन ने नोटिस देकर क्र्वाटर खाली करने के निर्देश अतिरिक्त दे डाले हैं। एचएमटी कामगार संघ अध्यक्ष भगवान सिंह ने बताया है कि प्रशासन और वन विभाग अपनी-अपनी भूमि की नापजोख कर रहा है। साथ ही क्वार्टर में बिजली-पानी की समस्या भी है। ऐसे में कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर परेशान हैं। जानकारी मिली है कि वन विभाग ने उक्त पफैक्ट्री को जो 33.33 एकड़ भूमि लीज पर दी, उसे वापस लेने की तैयारी है। सर्वे के बाद विभाग अपनी भूमि को लेगा। दूसरी ओर राज्य सरकार रानीबाग एचएमटी से अपनी 14 एकड़ भूमि लेने को नापजोख करवा चुकी है। बन्द हो चुकी फैक्ट्री से भूमि लेने के लिये जिला प्रशासन चैकन्ना है। बताते चलें कि 15 में शुरु हुई एमएमटी फैक्ट्री की स्थापना के लिए वन विभाग और राज्य सरकार ने लीज पर भूमि दी थी। फैक्ट्री का एक बड़ा हिस्सा एचएमटी प्रबन्ध्न ने स्वयं खदीदा था। 22 मार्च 2019 को पैफक्ट्री में अन्ततः ताला लगाना पड़ा। ऐसे में वन विभाग ने अपनी भूमि वापस ले ली। प्रबन्धन की 45.62 एकड़ भूमि के लिए नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन काॅरपोरेशन ने ई-टेंडर मंगाए हैं। साथ ही प्रशासन 13-14 एकड़ भूमि को कब्जा लेने के लिये सक्रिय है।