समर्पित गुरुजनों से संवारा जीवन जो हमेशा याद रहेंगे

चन्दन सिंह रावत बातचीज: तेजम का बचपन
पि.हि. प्रतिनिधि
हल्द्वानी। आज स्कूल-कालेजों में नवाचार को लेकर बहुत हल्ला किया जा रहा है जबकि पहले से गुरुजन पढ़ाने के साथ साथ समाज संवारने को अपनी जिम्मेदारी समझते थे और उनका समर्पण विद्यार्थियों का जीवन संवारने वाला था।
तेजम के पुराने दिनों को याद करते हुए चन्दन सिंह रावत बताते हैं कि विशम्भरदत्त जोशी जी प्रा.पाठशाला में गुरु जी थे, जिन्होंने खेल-खेल में बच्चों का जीवन संवारा। वह पहले धापा में भी रहे। धापा से तेजम आने के बाद ग्रामीण परिस्थितियों में वहां के अनुरूप बच्चों को सिखाते थे। बताते चलें कि तेजम के प्रहलाद सिंह जी के पुत्रों में चन्दन सिंह, डाॅ.प्रद्युमन सिंह, लक्ष्मण सिंह;लखनउ, ईश्वर सिंह ;देहरादून हैं। सारी स्थितियों को जीतने के बाद भी रावतों का यह परिवार अपने ग्राम, अपने गुरुजनों का स्मरण करता है और जुड़ा हुआ है। यह प्रेरणादायक है, यही नवाचार है।
चन्दन सिंह जी बतात हैं कि विशनदत्त मास्साब 1960 से 64 तक तेजम में रहे, जो इससे पहले मुनस्यारी के धापा में थे। स्कूल में पढ़ाई के लिये पूरा समय देने के अलावा प्रातःकाल प्रार्थना के समय ही उत्कृष्ट कार्यों के लिये बच्चों को प्रोत्साहित किया जाता था ताकि साथी बच्चे भी उससे उत्साहित हो। उदाहरण के लिये- मास्साब कहते आज फलां बालक बहुत साफ-सुथरा बनकर आया है। उसे प्रार्थना में आगे बुलाया जाता था। उसे देखकर अन्य साथी भी तैयारी करते। ग्राम को स्वच्छ रखना, जानवरों को किसी के भी खेतों में जाने से रोकने, एक-दूसरे की मदद करने जैसे विचार गुरुजन मन के भीतर कर देते थे जो आज भी हैं।