फुस्स एच.एम.टी.

अपनी-अपनी जमीन नपाई कर रहे हैं विभाग, कर्मी परेशान

कार्यालय प्रतिनिधि
हल्द्वानी। कभी रोजगार के बड़े सपने के साथ शुरु हुआ एचएमटी घड़ी कारखाना रानीबाग फुस्स हो चुका है। इसकी बन्दी को लेकर लम्बे समय से तैयारी चल रही थी लेकिन एनडी तिवारी समेत तमाम नेताओं के दबाव में इसे पाल रखा था। कर्मचारी यूनियन के आन्दोलनों और नेताओं के आश्वासन के बाद धीरे-धीरे कर्मी भी टूटते गये और लगभग सौ कर्मचारी ही इसकी टूटी बिल्डिंगों में डेरा डाले हुए हैं। उजाड़ दिखाई दे रही एचएमटी कालौनी को देख हर कोई उदास होगा क्योंकि जिन अरमानों के साथ एकमुक्त भूमि में इतना बड़ा कैम्पस बनाया गया था, उसका हाल खराब है। कुछ भवन तो धरासायी होने की स्थिति में हैं। ऐसे में स्टाफ क्वार्टर में रह रहे परिवार काफी परेशान हैं। बताया जा रहा है कि एचएमटी प्रबन्धन उनका पीएपफ सैलरी का मार्च तक का हिसाब नहीं कर रहा है। बेंगलुरु स्थित एचएमटी प्रबन्धन ने नोटिस देकर क्र्वाटर खाली करने के निर्देश अतिरिक्त दे डाले हैं। एचएमटी कामगार संघ अध्यक्ष भगवान सिंह ने बताया है कि प्रशासन और वन विभाग अपनी-अपनी भूमि की नापजोख कर रहा है। साथ ही क्वार्टर में बिजली-पानी की समस्या भी है। ऐसे में कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर परेशान हैं। जानकारी मिली है कि वन विभाग ने उक्त पफैक्ट्री को जो 33.33 एकड़ भूमि लीज पर दी, उसे वापस लेने की तैयारी है। सर्वे के बाद विभाग अपनी भूमि को लेगा। दूसरी ओर राज्य सरकार रानीबाग एचएमटी से अपनी 14 एकड़ भूमि लेने को नापजोख करवा चुकी है। बन्द हो चुकी फैक्ट्री से भूमि लेने के लिये जिला प्रशासन चैकन्ना है। बताते चलें कि 15 में शुरु हुई एमएमटी फैक्ट्री की स्थापना के लिए वन विभाग और राज्य सरकार ने लीज पर भूमि दी थी। फैक्ट्री का एक बड़ा हिस्सा एचएमटी प्रबन्ध्न ने स्वयं खदीदा था। 22 मार्च 2019 को पैफक्ट्री में अन्ततः ताला लगाना पड़ा। ऐसे में वन विभाग ने अपनी भूमि वापस ले ली। प्रबन्धन की 45.62 एकड़ भूमि के लिए नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन काॅरपोरेशन ने ई-टेंडर मंगाए हैं। साथ ही प्रशासन 13-14 एकड़ भूमि को कब्जा लेने के लिये सक्रिय है।