1930 में पद्मसिंह नैनीताल आये और 1958 से बना जोहार भवन

गोविन्द सिंह गड़बगी से बातचीज

डाॅ.पंकज उप्रेती
नैनीताल। सरोवर नगरी का जोहार भवन अपने आप में एक इतिहास बन चुका है। 1930 में नैनीताल आये पद्मसिंह गड़बगी ने 1958 में नवाब आॅफ छत्तारे प्रोस्पेक्ट लाॅज के नाम के इस भवन को खरीदा और फिर जोहार भवन का निर्माण शुरु किया। इस परिवार के मूल जनों के जोहार के पांछू ग्राम से माइग्रेसन समय में वह लोग धरमघर सिमगड़ी आया करते थे। गर्मी में जोहार और जाड़ों में सिमगड़ी की यह परम्परा थी। धीरे-धीरे यह पूरी परम्परा ही सिमट गई और जो जहाँ था वहीं बस गया। परिवार के वरिष्ठ सदस्य गोविन्द सिंह गड़बगी जो कि परिवहन निगम के वरिष्ठ लेखाकार पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, वह बताते हैं कि उनके पूर्वज मूल रूप से गढ़वाल के गड़बगा गाँव के थे जो जोहार आये। पुराने समय में उनके पिता पद्मसिंह जी 1930 में नैनीताल आये और तल्लीताल में किराये के मकान में रहते थे। 1954 में छत्तार नवाब के भवन को उन्होंने खरीदा और जोहार भवन नाम से इसका नवनिर्माण करवाया और यहीं के होकर रह गये। पद्मसिंह जी के तीन पुत्र स्व.उमेश सिंह, गोविन्द सिंह और रणजीत सिंह हुए। स्व. उमेशसिंह के दो पुत्र महेन्द्र और धीरज थे। गोविन्द सिंह जी के पुत्र ललितमोहन और पुत्री दीप्ति हैं। लक्ष्मण सिंह टेलीपफोन विभाग की पुत्री कंचन और हेमा हैं।
गड़बगी परिवार के पास पहले मल्लीताल में काफी सम्पत्ति थी। समय बीतने के साथ इसका स्वरूप बदला है। स्व. पद्मसिंह ने 1964 में शहीद सैनिक स्कूल को अपनी भूमि में बने हुए कमरे दान में दिये। इस विद्यालय के जमजमाव में उनका योगदान हमेशा स्मरण किया जाता रहेगा।
वर्तमान में जबकि जोहार के लोग देश भर व विश्व के तमाम देशों में फैल चुके हैं, नैनीताल के जोहार भवन सहित अपने बुजुर्गों की धरोहरों को निश्चित रूप से याद करते हैं। ऐसे में नैनीताल का जोहार भवन भी याद किया जाता है। जो जरूरतमंदों के अलावा जोहार के लोगों के लिये एक आश्रय का यह केन्द्र रहा है। नैनीताल के इतिहास में कई बदलाव होते रहे हैं लेकिन कुछ स्थान आज भी अपनी मौजूदगी को दर्शा रहे हैं। सरोवर नगरी की यह शान बनी रहे, इन्हीं कामनाओं के साथ।

पिघलता हिमालय 22 अप्रैल 2013 अंक से

कश्मीर फैसले पर प्रतिक्रिया

कार्यालय प्रतिनिधि
मोदी सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जो बड़ा फैसला लिया उसका जश्न पहाड़ से लेकर मैदान तक चारों ओर है। अनुच्छेद 370 की समाप्ति के लिये सरकार ने जिस प्रकार रणनीति बनाई और कदम उठाया है उसे लेकर विपक्ष चाह कर भी कुछ कहने की स्थिति में नहीं है। कश्मीर को लेकर कोई बड़ा ऐलान कभी तो होना ही थी, जिसे सरकार ने कर डाला। मोदी-शाह के कदम से हर मौका पार्टी के लिये बनता जा रहा है। देश के इस बड़े मसले को राजनीति के चश्मे से हटकर देखें तो एक देश एक सिद्धान्त की बात जरूरी थी। गुनगुन करते हुए या विरोध् ही करना है सोचकर विरोध् किया गया तो विकास नहीं हो सकता है। इसलिये सरकार के फैसले को और सच्चाई को समझना चाहिये। देश को जोड़ने के लिये, आतंक के खात्मे के लिये इस प्रकार के कदम उठाने जरूरी हैं। राजनीति के चश्मे से देखें तो- बड़ी सीधी सी बात है कि विपक्ष चाहे कुछ कहे आम जनता मोदी के हर फैसले से खुश है। यदि नहीं होती तो उन्हें दूसरी बार अथाह समर्थन देकर सरकार बनाने का मौका नहीं देती। इसे नरेन्द्र मोदी की चतुरता कहें, उनकी रणनीति कहें, उनका मिशन कहें, उनकी लहर कहें, उनकी सनक कहें………कुछ तो है।
जम्मू-कश्मीर को दो केन्द्र शासित प्रदेशों में बांटने वाले बिल पर संसद की मुहर लगते से पहले ही मैदान से लेकर पहाड़ तक जश्न होने लगा था। इस प्रकरण पर प्रतिक्रिया भी होने लगी लेकिन बहुमत सिर्फ यह देख रहा है कि कश्मीर का हल देशहित में हो। आम जनता के दिलो-दीमांग में पैठ चुका है कि कश्मीर में दोगली नीति चलने वाले भारत और पाकिस्तान के बीच अपने स्वार्थ सिद्ध कर रहे हैं, ऐसे में एक बार फैसला हो ही जाए। इसीलिए पूरे देश की आम जनता सिर्फ यह जान रही है कि धरा 370 हटने का लाभ होने जा रहा है। इसी बात का जश्न है। कुछ जानकारी रखने वाले अपने तर्क दे रहे हैं लेकिन उनके लिये कोई मौका नहीं है।
उल्लेखनीय है कि अपनी रणनीति में सफल रहे प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित साह ने प्रस्ताव को सदन में रखा। इसके पक्ष में 370 मत पड़े जबकि 70 मत विरोध् में थे। इस मौके पर गृहमंत्री ने कहा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। इसके बारे में कोई कानूनी या संवैधनिक विवाद नहीं है। इसके लिए कानून बनाने के लिये देश की संसद पूरी तरह सक्षम है। संसद ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा सम्बन्धी अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त करने के प्रस्ताव सम्बन्धी संकल्प और जम्मू कश्मीर को दो केन्द्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख में विभाजित करने वाले विधेयक को मंजूरी दी। गृहमंत्राी ने सदन को विश्वास आश्वासन दियचा कि स्थिति सामान्य होते ही जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने मंे इस सरकार को कोई परेशानी नहीं है।
जम्मू-कश्मीर में विशेष दर्जा समाप्त होते ही 70 साल पुराने अनुच्छेद 370 से जुड़ा जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को विशेषाधिकार देने वाला अनुच्छेद 35-ए भी समाप्त हो गया। इस साहसी फैसले से आजादी के 72 साल बाद कन्याकुमारी से कश्मीर तक देश में अब एक ही संबिधन और एक निशान लागू हो गया।
इध्र उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने भी केन्द्र सरकार के जम्मू-कश्मीर पर लिए गए ऐतिहासिक निर्णय पर उत्तराखण्ड की जनता की ओर से प्रधनमंत्री मोदी और केन्द्रीय गृहमंत्री शाह को बधाई दी है। सचिवालय में मीडिया से बातचीज में उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाने से जम्मू कश्मीर में विकास को बढ़ावा मिलेगा और वहाँ के लोग देश की मुख्य धारा में शामिल हो सकेंगे। प्रधनमंत्री ने अपने वायदे को निभाया है। उन्होंने कहा कि आज जम्मू कश्मीर का पुनर्जन्म हुआ है। प्रधनमंत्री मोदी ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 का प्रभाव खत्म करने का साहस दिखाया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व सांसद अजय भट्ट ने कहा कि भाजपा ने साबित कर दिया कि उसकी कथनी और करनी में कोई फर्क नहीं है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचन्द्र अग्रवाल ने कहा कि जनसंघ के संस्थापक श्यामाप्रसाद मुखर्जी का सपना वास्तव में आज पूरा हुआ। नेता प्रतिपक्ष इन्दिरा हृदयेश समेत अन्य ने भी केन्द्र सरकार के निर्णय को सराहा है।
इस ऐतिहासिक फैसले से कश्मीर की पीड़ा से यत्र-तत्र रह रहे कश्मीरी पण्डितों में विशेष खुशी है। हल्द्वानी व देहरादून में भी बसे ऐसे परिवारों ने खुशी मनाते हुए कश्मीर की चर्चा मीडिया से की और कहा अब वह दिन आ गया जिसका उन्हें इन्तजार था।

चाय बागान के नाम से मचता रहा हल्ला और बस गया शहर

पुराना चाय कारखाना

 

बेरीनाग चकोड़ी

पि.हि. प्रतिनिधि
सुरम्य नगरी बेरीनाग और चैकोड़ी के चाय बागान की भूमि को अपने कब्जे में लेने की सरकार की घोषणा के बाद से क्षेत्र में हलचल मची है। यह हलचल भय के साथ उम्मीदों भरी है। भय इस मायने में कि जो लोग अतिरिक्त जमीन दबाकर बैठे हैं उन्हें हिसाब देना होगा। और उम्मीद इसलिये जग रही है कि चाय बागान के नाम दर्ज भूमि के बाहर होते ही इस पर काबिज हो चुके लोग सरकार पर दबाव बना सकते हैं। इसकी तैयारी भी की जा रही है। विधयक मीना गंगोला भी जनता के इस पक्ष पर खड़ी हैं। सरकार के पफैसले से सहमे लोगों को तब ध्ैर्य हुआ जब विधायक ने कहा कि चाय बगान के कब्जेदारों को मालिकाना हक मिलेगा। सरकार ने भी इसी मंशा से फैसला लिया है। विधायक के बयान के बाद बेरीनाग और चकोड़ी में जमीन कब्जेदारों में राहत है और अनुमान लगाया जा रहा है कि जमीन की लीज समाप्त होने के बाद बागवान की भूमि से मालदार परिवार का नियंत्राण पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। सरकार के अधिपत्य में आने के बाद लोगों को मालिकाना हक मिलने में कोइ रुकावट पैदा नहीं होगी। सरकार जनहित में विशेषाधिकार प्रस्ताव लाकर यहाँ रह रहे पन्द्रह हजार से अधिक परिवारों को मालिकाना हक दे सकती है।
विधयक भले ही लोगों के बीच जाकर आश्वासन दे चुकी हैं लेकिन यह देखने की बात है कि चाय बागानों पर मालदार परिवार का नियंत्रण है होने के कारण इस पर बसे लोगों को मालिकाना हक देने के मामले में हमेशा से ही पंेच फंसता रहा है। सरकार के फैसले के बाद लोगों को बेघर होने का भय भी सता रहा है। सरकार के फैसले से मचे हड़कम्प के बाद लोग विधायक से मिले। भाजपा के मण्डल अध्यक्ष ध्ीरज बिष्ट कहते हैं कि भूमि विवाद पर नया फैसला ऐतिहासिक है। विश्वास है कि सरकार लोगों के हितों को देखते हुए मालिकाना हक जरूर देगी।
उल्लेखनीय है कि कभी चाय बागानों के लिये मशहूर बेरीनाग व चैकोड़ी में दानसिंह-मोहनसिंह बिष्ट मालदार के परिवार का दबदबा रहा था और बेसकीमती जमीन पर चाय का कारोबार होने के साथ ही विदेश तक चाय सप्लाई होती थी। ग्रामीण परिवेश में रहने वालों का और चाय बागान के मालिक के बीच तालमेल ही ऐसा था कि भूमि से किसी को कोई परेशानी नहीं। समय के साथ-साथ मालदार परिवार फैलता गया और गाँव भी तरक्की के लिये फैलने लगे। कई लोगों ने मालदार परिवार के सम्पर्क में रहकर बेरीनाग व चैकोड़ी मुख्य जगहों पर अपने रहने का ठिय्या बना लिया। आगे चलकर कुछ ने खरीद की और कुछ को दान में भूमि दे दी गई। जमीन की इस बांट में चायबागान का हल्ला मचता रहा और समानान्तर शहर बसता चला गया। मालदार परिवार की शाखाएं भी इतनी ज्यादा फैल गईं कि किस जमीन पर क्या होने जा रहा है, सारा हिसाब-किताब रखना आसान नहीं था। बाद के कुछ समय में कुंवर महिराज सिंह ने चैकोड़ी में जमीन को खूब बांटा। बहुत से लोग उनके प्रशंसक बन गये। आज बेरीनाग ठसाठस भर चुका है और चकौड़ी में शिक्षा का केन्द्र बनने के साथ ही रिसोर्ट, होटल, रेस्टोरेंट, आवास बन चुके हैं।
सरकार ने बेरीनाग और चैकोड़ी में चाय बागान की करीब 1047 हेक्टेयर भूमि वापस ले ली। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने इसके लिये आदेश जारी किये। उनका कहना है कि यह भूमि चाय बागान के लिये दी गई थी लेकिन इसका उपयोग चाय उत्पादन के लिये नहीं हुआ और इस भूमि पर अवैध् कब्जे हो रहे हैं।
इसी भूमि को लेकर कोर्ट में वाद चल रहे हैं। चाय बागान के लिये दी गई भूमि सीलिंग एक्ट में नहीं थी। राजस्व ने इसे फी सिंपल इस्टेट ;ऐसी भूमि जिसके स्वामी को भू उपयोग के अधिकार प्राप्त हो माना और पाया कि चाय बागान के विकास के लिये ही यह भूमि गाँव के लोगों को दी गई थी। यह भी पाया गया कि अधिकतम स्रोत सीमा आरोपण अधिनियम ;सीलिंग एक्ट के तहत इस भूमि के लिए राज्य सरकार ने छूट भी प्रदान की थी। बेरीनाग प्रशासन ने मामले की जाँच की तो पाया कि भूमि पर कब्जे हो रहे हैं और मकान-दुकान तक बना लिए गए। प्रशासन ने भूमि की खरीद- फरोख्त पर रोक लगाई तो मामला हाईकोर्ट पहँुचा। बताया जाता है कि जिन खातेदारों के पास चाय के बगान के लिए भूमि थी, उन्होंने अन्य लोगों को यह जमीन रजिस्ट्री, दाननामा और स्टाम्प पेपर पर इकरारनामा कर बेच दी। इसके लिये राज्य सरकार की अनुमति नहीं ली गई। भूमि की खरीद- फरोख्त पर रोक के लिये जिला और उच्च न्यायालय में मामले पहँुच गये।