रायबहादुर मुंशी हरि प्रसाद टम्टा

हरि ने हरे पिछड़े भूमिहीनों के दर्द
डॉ दुर्गा प्रसाद
अल्मोड़ा: एतिहासिक नगरी में एक सपूत ने जन्म लिया जिसका नाम था हरि प्रसाद टम्टा। उत्तराखंड के सामाजिक, शैक्षिक व आर्थिक रूप से पिछडे़ भूमिहीन शिल्पकारों को संगठित करने, हक-हकूक की लड़ाई लड़ने वाले अल्मोड़ा के रायबहादुर मुंशी हरि प्रसाद टम्टा ने सामाजिक सौहार्द की दिशा दी। असुविधा के उस दौर में अल्मोड़ा में जन सुविधाओं के लिए भी उन्होंने काफी संघर्ष किया। 19वीं शताब्दी के शुरू में समाज हित में संघर्ष करने वालों समाज सुधारकों में मुंशी हरि प्रसाद टम्टा का नाम भी प्रमुखता से शामिल है। वह आजन्म एक निष्काम कर्मयोगी की भांति परोपकार के कार्यो में जुटे रहे।
उन्होंने सामाजिक हितों व हक-हकूकों के लिए संघर्ष करते हुए उत्तराखंड में विभिन्न उप जातियों में बंटे उपेक्षित वर्ग के लोगों को एकजुट किया और उनके स्वाभिमान को जगाने का काम किया। भले ही रूढि़वादिता के कारण समाज में उन्हें कई बार अपमान का सामना करना पड़ा। अपमान की घटनाओं में
सन् 1913 में म्यूनिसिपल बोर्ड अल्मोड़ा में मुंशी हरि प्रसाद टम्टा के मामा कृष्ण टम्टा सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए, तो उस दौर में रूढि़वादी विचारों के चलते विरोधी स्वर के जरिये अपमान सहना पडा। इसके अलावा सन् 1911 में जार्ज पंचम की राजनैतिक ताजपोशी पर बद्रेश्वर अल्मोड़ा में सजे जश्न कार्यक्रम में उन्हें आमंत्रित करने पर भी हरि प्रसाद टम्टा व उनके मामा को रूढि़वादिता के चलते अपमान का झेलना पड़ा। सन् 1925 में अल्मोड़ा में कुमाऊं व गढ़वाल के शिल्पकारों के सम्मेलन के दौरान भी नगर में अपमान का सामना करना पड़ा।
ऐसी घटनाओं के बावजूद वह अपने मकसद से डिगे नहीं, बल्कि सहनशील बनकर आगे बढ़े। उनकी सहनशीलता व धैर्य समाज में सामाजिक समरसता का भाव पैदा करता गया। उन्होंने अल्मोड़ा में बिजली, पानी, सडक, शिक्षा व स्वच्छता के लिए भी संघर्ष किया और सच्चे समाज सेवक के रूप में पहचान बनाई। उनके इसी व्यक्तित्व, सहनशीलता व समाज सेवा का परिणाम है कि आज भी उन्हें लोग भूले नहीं। पर्वतीय क्षेत्र में यातायात की व्यवस्था उस दौर में नगण्य थी, उन्होंने यह सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सन् 1920 में हिल मोटर ट्रांसपोर्ट की स्थापना अपने अनुज स्व. लालता प्रसाद के सहयोग से सर्वप्रथम आरंभ की। उनकी जयंती पर हर वर्ग के लोग एकजुट होकर उन्हें याद कर करते हैं। उनसे समाज सेवा की प्रेरणा लेकर सामाजिक समरसता की दिशा में कदम बढ़ाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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