
कार्यालय प्रतिनिधि
उत्तराखण्ड क्रान्तिदल के शीर्ष नेता काशीसिंह ऐरी का कहना है, ‘राष्ट्रीय पार्टियों ने पहाड़ की जनता को मून सा दिया है, यह चिन्ता है। इन पार्टियों का ने आम जनता की आँखों में धूल झौंकी है जिसे समझना होगा। आज चेतनाशून्यता की स्थिति है। युवाओं को बरगलाया जा रहा है और प्रलोभन में फंसाया जा रहा है।’
श्री ऐरी आगे कहते हैं कि आज उत्तराखण्ड की स्थिति को सबको समझना चाहिये। पहले विकास की योजनाएं बनती थी लेकिन पहाड़ नहीं चढ़ पाती थी। इसीलिए उत्तराखण्ड राज्य की परिकल्पना की गई थी ताकि छोटे राज्य में विकास हो, युवाओं का रोजगार मिले, यहाँ की समस्याओं की सुनवाई हो। लेकिन राज्य बनने के बाद से सब उल्टा होने लगा है। उल्टे-पुल्टे कार्यों पर लगाम नहीं है। यदि किसी को टोका जाता है तो वह किसी न किसी सम्बन्ध्-सम्पर्क से अपना बचाव कर लेता है। सम्वेदन शीलता नहीं रह गई है कि जनता क्या कहेगी। यह जानते हैं उनकी मनमानी पर कोई कुछ नहीं कहने वाला है। चाहे जो कुछ कर लो, जनता इन्हें वोट दे देगी। उपर से नीचे तक भ्रष्टाचारियों की चैन बनी हुई है। तमाम योजनाओं में घपले उजागर भी हुए है लेकिन सबकुछ दबा दिया जाता है। इनकी ओर से जनता को सुविधा मिले या न मिले, विकास हो या न हो, वोट मिल जायेगा। इन्होंने जनता को मून लिया है। चेतनाशून्यता की यह स्थिति खतरनाक है। उत्तराखण्ड किधर जा रहा है, राज्य कितने कर्ज में डूब गया है, विकास योजनाएं किस तरह से धरातल में नहीं उतर रही हैं, करोड़ों के भ्रष्टाचार के मामले उजागर होकर भी लीपापोती में हैं, इन्हें कोई पफर्क नहीं पड़ता। ये सब मौज में हैं और जनता को भ्रमित कर राज कर रहे हैं।
उत्तराखण्ड राज्य बनाने के पीछे रोजगार की बात, विकास की बात के अलावा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना चाहते थे। सपना था हमारा राज्य बनेगा तो शिकायतों की सुनवाई होगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा परन्तु यहाँ तो कोई सुनने वाला ही नहीं है। मंत्री ही भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। सन्निर्माण श्रमिक बोर्ड में ही करोड़ों का घपला है, जाँच की लीपापोती होती रहती है। घपला करने वाले ही जाँच करने वाले हो जाएंगे तो क्या उम्मीद की जा सकती है। इस बेहाल राज्य को सुधार के लिये सबने जगना होगा।
