
चम्पावत – जिला अंतर्गत पाटी विकासखण्ड में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं । लेकिन सरकार द्वारा अब तक विकासखण्ड के कई पर्यटन संभावित क्षेत्रों में कोई भी सकारात्मक पहल नहीं की गई है । जिससे खुद की अलग पहचान बनाने की संभावनाओं वाला ये क्षेत्र लगातार पिछड़ता जा रहा है । गातव्य हो कि ब्लॉक मुख्यालय से 15 किलोमीटर की दूरी पर कूँण गाँव में बाँज के जंगलों से घिरी पहाड़ी में स्थित जैचम निर्मांसी का मन्दिर स्वयं में एक पर्यटक स्थल है । जिसे मन्दिर में बीते दशकों से रह रहे महात्मा ने एक रमणीक स्थल बनाने में मुख्य व अहम योगदान दिया है । बताते चलें कि चोटी पर स्थित इस मन्दिर से आस – पास का समूचा क्षेत्र दिखाई देता है । शाम के वक्त मन्दिर से आसपास की पहाड़ियों का दिखाई देने वाला अनूठा नजारा मन को शान्ति प्रदान करने वाला तो होता ही है इसके अलावा मंद हवाओं के बीच प्रकृति की गोद में बैठकर इन नजारों को देखना सांसारिक थकान को भी दूर करता है । और आसपास के इलाके से इस पहाड़ी का अनूठा दृश्य देखने को मिलता है । यह क्षेत्र सुबह हल्के कोहरे से ढका रहता है , तो दोपहर में साफ मौसम के साथ पहाड़ी के ऊपर बादल मंडराते नजर आते हैं । और सूर्य ढलने के बाद शाम के वक्त अगर कोई इस दृश्य को देखता है तो फोटोग्राफी करने से खुद को नहीं रोक पाता है । शाम के वक्त आसमान में हल्की लालिमा लिए बादलों का जमावड़ा पहाड़ी को और भी खूबसूरत बना देता है । और ये लालिमा सूर्य ढलने के काफी देर रात होने तक दिखाई देती है । इसके साथ – साथ पास में ही कणकश्वेर त्रिवेणी के समीप रौलमेल में देवदार वनी के बीच स्थित शिव मन्दिर पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है । लेकिन सरकार की उदासीनता के चलते इन ऐतिहासिक , पौराणिक व सुरम्य स्थानों पर विकासकार्य ठप नजर आ रहे हैं । इन पर्यटन संभावित स्थानों में विकास के नाम पर जनप्रतिनिधि सिर्फ चुनावों में नजर आते हैं । जानकारों के मुताबिक अगर सरकार इन स्थानों पर पर्यटन को विकसित करने के लिए कदम उठाती है तो ये स्थान बहुत जल्दी बेहतरीन पर्यटन स्थलों की सूची में शुमार हो जायेंगे ।
( सूर्य ढलने के बाद दिखाई देने वाला जैचम पहाड़ी का मनोरम दृश्य – छाया व विवरण सूरज लडवाल )

