श्रद्धांजलि स्व.शमशेरसिंह बिष्ट

आन्दोलन का भरोसा थे
अल्मोड़ा। जन आन्दोलनों में अग्रणीय रहे डाॅ. शमेशर सिंह बिष्ट का 22 सितम्बर 2018 की प्रातः निधन हो गया। समाजसेवी, पत्रकार के रूप में भी वह आम जन की आवाज उठाते रहे। उत्तराखण्ड संघर्ष वाहिनी के मुखिया के रूप में वह जनता की आवाज उठाते रहे। बिष्ट जी आन्दोलनों का भरोसा थे। अपने छात्र जीवन से ही वह अन्याय के खिलाफ आन्दोलनों में जुड़े रहे। मूल रूप से खटल गाँव, स्याल्दे निवासी डाॅ.शमशेर सिंह बिष्ट का जन्म 4 फरवरी 1947 को अल्मोड़ा में हुआ। बचपन से ही मेधवी और जुझारु बिष्ट जी 1972 में अल्मोड़ा कालेज में छात्रा संघ अध्यक्ष बने। उनके आन्दोलन तरीका एकदम अलग था। जब वह छात्रा संघ चुनाव लड़े थे तब उन्होंने एक मोहर बनाई थी और दूसरे छात्र नेताओं द्वारा फैंके गये पर्चे-बिल्लों के पीछे अपनी मोहर लगाकर बांट देते। उनके सोचने और समझाने का यह तरीका हर किसी को भाता था। उत्तराखण्ड आन्दोलन सहित जल, जंगल, जीमन की बातों पर वह बेवाक लिखते व बोलते थे। पिछले दो साल से स्वास्थ्य विकार के कारण उन्हें दिक्कत थी, बावजूद वह बैठकों, सभा, आन्दोलनों में जुड़े रहे। आर्य समाज के साथ स्वामी अग्निवेश से वह बहुत प्रभावित रहे। स्वास्थ्य बहुत खराब होने के बाद उन्हें दिल्ली अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। वह इलाज करवाकर अल्मोड़ा आ गये और दवाईयों खाने के अलावा स्वध्याय में लगे रहे। किताबों के दोस्त और समझ रखने वाले डाॅ.शमशेर की कल्पना थी- ‘किताब घर’। तभी उनके प्रतिष्ठान का नाम किताबघर रखा गया। जिसमें स्तरीय पुस्तकों का खजाना है।
स्व.बिष्ट जी व उनके परिवार का पिघलता हिमालय परिवार से गहरा रिश्ता है। वह हर सुख-दुःख में शामिल होते रहे हैं। बिष्ट जी के पत्नी श्रीमती बिष्ट अध्यापिका रही हैं। उनके सुपुत्रा अयजमित्र व जयमित्र जानेमाने फोटोग्राफर, ट्रैकर व समाजसेवी हैं। स्व.बिष्ट अपने पीछे ईष्ट-मित्र-भरापूरा परिवार छोड़ गये हैं। पिघलता हिमालय परिवार उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

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