गुप्तेश्वर धाम हनुमान मन्दिर के सन्त रिषिकेश गिरी

गुप्तेश्वर में जिन्होेंने अनुशासन कायम कर युवाओं को राह दिखाई

बेरीनाग/गणाई। वर्ष 2020 की विदाई पर गुप्तेश्वर धाम हनुमान मन्दिर के सन्त 101 वर्षीय रिषिकेश गिरी महाराज ने अपना शरीर त्याग दिया। बेरीनाग-अल्मोड़ा मुख्यमार्ग पर बेरीनाग से दस किमी दूरी पर गोदीगाड़ नामक स्थान है। नीम करौली महाराज के परम शिष्य रिषिकेश ने यहाँ अनुमान मन्दिर स्थापित कर जिस प्रकार से अनुशासन बनाया और युवाओं को राह दिखाई, वह हमेशा याद किये जायेंगे।
नीम करौली महाराज की सेवा में बचपन से ही समर्पित गुप्तेश्वर;गोदीगाड़ के इस सन्त ने अपने गुरु आदेश पर अल्मोडा बेरीनाग मार्ग के पास पहाड़ी पर गोदीगाड़ बांसपटान के पास दिव्य मन्दिर की स्थापना करवाई और आसपास समाज को जोड़कर इसके प्रबन्धन की व्यवस्था की। मन्दिर के सौन्दर्यीकरण सहित इसके रख-रखाव का प्रबन्ध् करवाया। यहाँ अनुशासन बनाये रखने के लिये उन्होंने सख्त कदम उठाये ताकि अराजक तत्व मन्दिर को पिकनिक का केन्द्र न बना सकें। उनकी सेवा में जुटे भक्तों ने भी इस परम्परा में पूरा योगदान दिया जो बना हुआ है। मन्दिर में पूजा पाठ के लिये गणाई से उपाध्याय पुजारी को भी तैनात करने के साथ ही भोजन प्रसाद की नियमित व्यवस्था बनाई। इस मन्दिर में आने वाले श्रद्धालुओं को बाबा स्वयं अपने हाथों प्रसाद बांटते, भोजन कक्ष में प्रसाद वितरण होता। इतनी दिव्य और भव्य व्यवस्था को पहाड़ में स्थापित करना चुनौती था लेकिन रिषिकेश गिरी महाराज ने बिना किसी के सामने हाथ फैलाते हुए यह सब किया। उन्हें हनुमान की अराधना पर विश्वास था और कहते थे- ‘‘पथभ्रष्ट समाज को सुधरने के लिये उपाय करने चाहिये। जो अनुशासन तोड़ता है उसे स्वयं दण्ड का भागीदार बनना पड़ता है।’’ गुप्तेश्वर मन्दिर की दिव्यता के दर्शन के लिये दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं और अपनी श्रद्धा से सहयोग भी करते हैं।
अपनी गद्दी में बैठे रिषिकेश गिरी महाराज आने वाले श्रद्धालुओं को प्रेमभाव से देखते और जरूरत पड़ने पर डांटते भी थे। वह कहते- ‘‘आजकल के पड़े-लिखे से हम अनपढ़ अच्छे हैं। क्या होता है इन डिग्रियों का, जब हम अपने समाज में व्यर्थ बने हुए हैं। मास्टर पढ़ाते नहीं, बच्चे पढ़ते नहीं। इन्हें सुधरना चाहिये।’’
उनकी प्रत्येक बात में कोई रहस्य होता था और मेहनती लोगों वह सराहना भी करते।
बेरीनाग, गंगोलीहाट, राममन्दिर/बौराण गणाई आस-पास के तमाम ग्रामवासी माहाराज के दर्शनों को आया करते थे। इसके अलावा मन्दिर के समीप के ग्रामों का तो यह केन्द्र ही बन चुका है। अब जबकि सच्चे, सरल, हनुमान भक्त रिषिकेश गिरी महाराज अपनी देह त्याग चुके हैं गुप्तेश्वर मन्दिर की व्यवस्था को यथावत बनाये रखने का दायित्व ग्राम वासियों का है। महाराज जी की स्मृतियाँ उनके प्रत्येक जानने वाले के स्मरण हैं। साथ ही गुप्तेश्वर मन्दिर व उनके द्वारा किये गये कार्यों के कारण भी वह सदा याद किये जायेेंगे।

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