
पर्यावरण संरक्षण के लिये जसपुर-टनकपुर में भी किया प्रदर्शन
डाॅ. पंकज उप्रेती
पर्यावरण संरक्षण व जनचेतना के नाम पर हो-हल्ला मचाती भीड़ से हटकर ठोस कार्य करने वालों में त्रिलोचन पपनै अग्रणीय हैं। 89 वर्ष के श्री टी.सी. पपनै ने सुन्दरलाल बहुगुणा के साथ पंचेश्वर से उत्तरकाशी तक पैदल यात्रा करते हुए पर्यावरण का सन्देश दिया था। तराई-भाबर में यूकेलिप्टस के विरोध् में आन्दोलन छेड़ने वाले इस समाजसेवी ने जसपुर से टनकपुर तक पदयात्रा करते हुए समाज को चेताया था। सरकारी सेवा में तहसीलदार पद से सेवानिवृत्त पपनै जी अपनी राजकीय सेवा में भी कर्मठ और उर्जावान बनकर समाज को जोड़ते रहे। सामाजिक सरोकारों से जुड़े श्री पपैन ने हर हमेशा समाज को संरक्षक के रूप में संवारा। हल्द्वानी के जजफार्म क्षेत्रा को नियोजित तरीके से बसाने में वह सक्रिय रहे। क्षेत्रवासियों के साथ बैठकें करते हुए नित कोई न कोई गतिविधि वह करते रहे हैं। उनका त्याग-तपस्या उनके परिवार के रूप में समाज के सामने है। उन्हें कभी भी किसी पद-प्रतिष्ठा का गुमान नहीं रहा है, वह सीधा-सादा जीवन व्यतीत करने पर विश्वास करते हैं और समाज को भी उनका यही सन्देश रहा है। लोक चेतना मंच, हिमालय संगीत शोध् समिति सहित कई संस्थाओं में वह संरक्षक के रूप में रहे हैं। उनका लेखक रूप भी है, उन्होंने 1982 में कमल साहित्यालंकार (कृतित्व एवं व्यक्तित्व) पुस्तक का प्रकाशन करते हुए पहाड़ के साहित्यकार के परिचय के बहाने अपने पहाड़ अनुराग को प्रकट किया। पहाड़ की संस्कृति, कला, बोली-भाषा को उन्होेंने नई पीढ़ी के लिये प्रस्तुत किया। ‘धरती पर दूधातोली’, ‘झुरमुट’ कविता संग्रह, ‘मेरा गाँव’ उनकी कृतियां हैं। इस समय उनका कविता संग्रह ‘फुहार’ भी तैयार हो चुका है, जो अप्रकाशित है।
6 अगस्त 1931 को जन्मे त्रिलोचन पपनै (त्रिलोक चन्द्र पपनै) का मूल निवास ग्राम घुग्ती केलानी अब चेक केलान, पट्टी मल्ला चैकाटे, देघाट जिला अल्मोड़ा है। पिता स्व.ईश्वरीदत्त पपनै व माता शारदा देवी घर जन्मे त्रिलोक चन्द्र पपनै राजनीति विज्ञान से स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त कर अध्यापन कार्य से कर्म क्षेत्र में पर्दापण कर चुके थे, जो बाद में राजस्व विभाग में तहसीलदार पद से सेवानिवृत्त हुए। राजकीय सेवा के बाद विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़कर पर्यावरण, नशामुक्ति, महिला एवं वाल विका आदि कार्यों में भाग लेकर अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन हैदराबाद, उदयपुर सहित राज्य व क्षेत्रीय सम्मेलनों में मुख्य भूमिका में रहे। ़क्षेत्र पंचायत हल्द्वानी के बीडीसी सदस्य रहे श्री पपनै को उत्कृष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पदक सहित अनेकों प्रशस्ति पत्र मिल चुके हैं। हल्द्वानी के विकास पुरम् जजफार्म रहने वाले टी.सी.पपनै जी की पत्नी श्रीमती सावित्री पपनै भी बहुत ही उदार महिला हैं। इनके पुत्र- स्व.विनोद, बहु ललिता (अध्यापिका), पौती दीप्ती (अमेरिकाद), पौता दिव्यांशु (दुबईद्ध, दूसरे पुत्र अशोक (जसपुर शूगर मिल में),बहू मंजू, पौता दीपक (एयरफोर्सद), भारतेन्दु (;ताइवान में), तीसरे पुत्र कैलाश पपनै (शिक्षक), बहू श्रीमती हंशा, पौता पौती- मेघा व देवांश हैं।
