महादेव अवतार ‘जैं श्री गबला देव’

दारमा घाटी’
नरेन्द्र सिंह दताल
उत्तराखण्ड हिमालयी भू-भाग हिन्दू धर्म के देवी-देवताओं का निवास स्थान है। इस कारण उत्तराखण्ड को देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है। इसका प्रमाण आदिकाल से ही मिलता है।
उत्तराखण्ड के अन्तर्राष्ट्रीय सीमान्त क्षेत्र लुग्बा रं क्षेत्र में पौराणिक कैलास पति महादेव जी का अवतार माने जाने वाले वरदानी देव/न्यायप्रिय, न्याय का देवता ग्राम दांतू में प्रतिष्ठित हैं, जिसे हम रं जन ‘जय श्री ह्या गबला देव’ के नाम से सम्बोधित करते हैं। इसे दांतू/दंग्तों जय श्री ह्या गबला देव भी कहते हैं। यह ग्राम दांतू, तहसील धारचूला, जिला पिथौरागढ़ के ‘दारमा घाटी’ में स्थित है। जैं श्री ह्या गबा देव जी की वेषभूषा ‘रंगा-सिले’ सफेद रंग का धरण कर ढाल-तलवार शस्त्र लेकर सफेद घोड़े की सवारी करते हैं। वर्तमान समय तक में जय श्री ह्या गबला देव रं लुंग्बा के लगभग अधिकृत ग्राम में विराजमान है। यह श्री ह्या गबला देव को लोग ‘जन देवता’ भी कहते हैं।
जै श्री ह्या गबला देव को अधिकतर रं ग्रामजन परमपिता ईष्टदेव मानते हैं। कष्ट, दुःख, विवादित न्यायिक समस्याओं से पीड़ित लोग अपने कष्ट, दुःखों का निवारण हेतु श्री ह्या गबला देव ईष्ट देव की शरण में आते हैं।
ऐसी मान्यता है कि प्राचीन समय में श्री ह्या गबला देव जन न्याय करवाने के लिये ग्राम दांतू के ‘हैली/सैली पंग् दंग् थंग् मैदान’ में सभी पक्ष-विपक्ष व ग्राम प्रमुखों की उपस्थिति में सभी समस्याओं का निवारण करते थे। ग्राम दांतू/दंग्तों को प्रागैतिहासिक काल से ही ऐतिहासिक ‘ग्राम’ माना जाता है क्योंकि यह भूमि सर्वप्रथम ह्या गबला देव की जन्मभूमि, कर्मभूमि, न्यायभूमि रही है। ग्राम दांतू वह भूमि है, जहां रं लुंग्बा के 36 कोटि देवी-देवताओं का पौराणिक काल से ही जय श्री ह्या गबला देव के प्रांगण में एकत्रित होकर सभी बिन्दुओं से सम्बन्धित विषय पर मंत्रणा व विचार गोष्ठी का आयोजन किया जाता था/है। इसी कारण ग्राम दांतू को श्री ह्या गबला देव का उच्च न्यायालय माना जाता है। जय श्री ह्या गबला देव के प्रांगण में देवी देवताएं अन्त में उत्सव मनाते हुए अपने अपने कर्मस्थली की ओर चले जाते थे।
ग्राम दांतू दारमा में हर वर्ष जय श्री ह्या गबला देव ‘दारमा महोत्सव’ के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। यह ‘गबला दारमा महोत्सव’ दारमा घाटी के सभी ग्रामों के गणमान्य बुद्धिजीवियों के विचार-विमर्श के द्वारा, सर्वप्रथम 1977 से हर साल अगस्त माह में मनाते आ रहे हैं। ग्राम दांतूम में आयोजित ‘प्रथम दारमा गबला महोत्सव मेला’ का मुख्य नेतृत्वकर्ता स्व. डूंगर सिंह ढकरियाल, स्व. नैन सिंह बोनाल, स्व. शेर सिंह दुग्ताल, स्व. ददिमल सिंह दताल, स्व. लक्ष्मण सिंह दताल, स्व. रूप सिंह दताल, ‘छैवा राठ’, सुन्दर सिंह बोनाल, देव सिंह दुग्ताल, धर्म सिंह बनग्याल, धर्मसिंह बोनाल और रूप सिंह दताल ;नेता जी थे और सभी दारमा रं ग्राम वासियों ने संयुक्त रूप से नेतृत्व व हर प्रकार से सहयोग कर बहुत सुन्दर मेला का आयोजन कराया गया था, जो आज भी हम सब रं वासी याद करते हैं। यह ‘गबला महोत्सव’ दामरा मेला 15 अगस्त से 30 अगस्त के मध्य शुभ दिन प्राकृतिक पुष्पीय व फसलीय पुष्पीय प्रकृति के बीच मनाया जाता है। अगस्त माह में प्राकृतिक व फसलीय सुन्दर पुष्पीय सुन्दरता देखने को मिलती है। इस गबला महोत्सव में तल्ला-मध्य-मल्ला दारमा ग्रामों के ग्रामवासियों के अतिरिक्त व्यांस, चैंदास घाटी के लोग और तहसील धारचूला के अन्य लोग शामिल होते हैं।
जय श्री ह्या गबला महोत्सव ;दारमा गबला महोत्सवद्ध में सर्वप्रथम सभी रं ग्राम प्रतिनिधि और रं मं जन सामूहिक गबला पूजन कर महोत्सव का शुभारम्भ करते हैं। यह ‘दारमा महोत्सव’ का कार्यक्रम तीन दिनों तक चलता है। इस मेले में सामाजिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेलकूद क्रियाकलाप और अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस आयोजन को संचालित करवाने में हिमवीर आईटीबीपी ढाकर-दारमा घाटी बटालियन भी सहयोग कर श्री ह्या गबला देव का पूजन कर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं।
ह्या सम्बोधन-
जैं/जय श्री ह्या गबला देव न्याप्रिय उदार, न्यायवादी, परोपकारी, प्रजा सेवक के रूप में कार्य करने की मानवीय प्रवृत्ति के कारण हम सभी रं जन उनके नाम के आगे ह्या ;बड़े भाई शब्द को जोड़कर जय श्री ह्या गबला देव के नाम से सम्बोधित करते हैं।
‘‘जै श्री ह्या गबला देव हम सब पर अपनी कृपा दृष्टि बनाये रखना’’ दारमा घाटी’ नरेन्द्र सिंह दताल
उत्तराखण्ड हिमालयी भू-भाग हिन्दू धर्म के देवी-देवताओं का निवास स्थान है। इस कारण उत्तराखण्ड को देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है। इसका प्रमाण आदिकाल से ही मिलता है।
उत्तराखण्ड के अन्तर्राष्ट्रीय सीमान्त क्षेत्रा लुग्बा रं क्षेत्र में पौराणिक कैलास पति महादेव जी का अवतार माने जाने वाले वरदानी देव/न्यायप्रिय, न्याय का देवता ग्राम दांतू में प्रतिष्ठित हैं, जिसे हम रं जन ‘जय श्री ह्या गबला देव’ के नाम से सम्बोधित करते हैं। इसे दांतू/दंग्तों जय श्री ह्या गबला देव भी कहते हैं। यह ग्राम दांतू, तहसील धारचूला, जिला पिथौरागढ़ के ‘दारमा घाटी’ में स्थित है। जैं श्री ह्या गबा देव जी की वेषभूषा ‘रंगा-सिले’ सफेद रंग का धरण कर ढाल-तलवार शस्त्रा लेकर सफेद घोड़े की सवारी करते हैं। वर्तमान समय तक में जय श्री ह्या गबला देव रं लुंग्बा के लगभग अधिकृत ग्राम में विराजमान है। यह श्री ह्या गबला देव को लोग ‘जन देवता’ भी कहते हैं।
जै श्री ह्या गबला देव को अधिकतर रं ग्रामजन परमपिता ईष्टदेव मानते हैं। कष्ट, दुःख, विवादित न्यायिक समस्याओं से पीड़ित लोग अपने कष्ट, दुःखों का निवारण हेतु श्री ह्या गबला देव ईष्ट देव की शरण में आते हैं।
ऐसी मान्यता है कि प्राचीन समय में श्री ह्या गबला देव जन न्याय करवाने के लिये ग्राम दांतू के ‘हैली/सैली पंग् दंग् थंग् मैदान’ में सभी पक्ष-विपक्ष व ग्राम प्रमुखों की उपस्थिति में सभी समस्याओं का निवारण करते थे। ग्राम दांतू/दंग्तों को प्रागैतिहासिक काल से ही ऐतिहासिक ‘ग्राम’ माना जाता है क्योंकि यह भूमि सर्वप्रथम ह्या गबला देव की जन्मभूमि, कर्मभूमि, न्यायभूमि रही है। ग्राम दांतू वह भूमि है, जहां रं लुंग्बा के 36 कोटि देवी-देवताओं का पौराणिक काल से ही जय श्री ह्या गबला देव के प्रांगण में एकत्रित होकर सभी बिन्दुओं से सम्बन्धित विषय पर मंत्रणा व विचार गोष्ठी का आयोजन किया जाता था/है। इसी कारण ग्राम दांतू को श्री ह्या गबला देव का उच्च न्यायालय माना जाता है। जय श्री ह्या गबला देव के प्रांगण में देवी देवताएं अन्त में उत्सव मनाते हुए अपने अपने कर्मस्थली की ओर चले जाते थे।
ग्राम दांतू दारमा में हर वर्ष जय श्री ह्या गबला देव ‘दारमा महोत्सव’ के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। यह ‘गबला दारमा महोत्सव’ दारमा घाटी के सभी ग्रामों के गणमान्य बुद्धिजीवियों के विचार-विमर्श के द्वारा, सर्वप्रथम 1977 से हर साल अगस्त माह में मनाते आ रहे हैं। ग्राम दांतूम में आयोजित ‘प्रथम दारमा गबला महोत्सव मेला’ का मुख्य नेतृत्वकर्ता स्व. डूंगर सिंह ढकरियाल, स्व. नैन सिंह बोनाल, स्व. शेर सिंह दुग्ताल, स्व. ददिमल सिंह दताल, स्व. लक्ष्मण सिंह दताल, स्व. रूप सिंह दताल, ‘छैवा राठ’, सुन्दर सिंह बोनाल, देव सिंह दुग्ताल, धर्म सिंह बनग्याल, धर्मसिंह बोनाल और रूप सिंह दताल ;नेता जी थे और सभी दारमा रं ग्राम वासियों ने संयुक्त रूप से नेतृत्व व हर प्रकार से सहयोग कर बहुत सुन्दर मेला का आयोजन कराया गया था, जो आज भी हम सब रं वासी याद करते हैं। यह ‘गबला महोत्सव’ दामरा मेला 15 अगस्त से 30 अगस्त के मध्य शुभ दिन प्राकृतिक पुष्पीय व फसलीय पुष्पीय प्रकृति के बीच मनाया जाता है। अगस्त माह में प्राकृतिक व फसलीय सुन्दर पुष्पीय सुन्दरता देखने को मिलती है। इस गबला महोत्सव में तल्ला-मध्य-मल्ला दारमा ग्रामों के ग्रामवासियों के अतिरिक्त व्यांस, चैंदास घाटी के लोग और तहसील धारचूला के अन्य लोग शामिल होते हैं।
जय श्री ह्या गबला महोत्सव ;दारमा गबला महोत्सवद्ध में सर्वप्रथम सभी रं ग्राम प्रतिनिधि और रं मं जन सामूहिक गबला पूजन कर महोत्सव का शुभारम्भ करते हैं। यह ‘दारमा महोत्सव’ का कार्यक्रम तीन दिनों तक चलता है। इस मेले में सामाजिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेलकूद क्रियाकलाप और अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस आयोजन को संचालित करवाने में हिमवीर आईटीबीपी ढाकर-दारमा घाटी बटालियन भी सहयोग कर श्री ह्या गबला देव का पूजन कर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं।
ह्या सम्बोधन-
जैं/जय श्री ह्या गबला देव न्याप्रिय उदार, न्यायवादी, परोपकारी, प्रजा सेवक के रूप में कार्य करने की मानवीय प्रवृत्ति के कारण हम सभी रं जन उनके नाम के आगे ह्या ;बड़े भाई शब्द को जोड़कर जय श्री ह्या गबला देव के नाम से सम्बोधित करते हैं।
‘‘जै श्री ह्या गबला देव हम सब पर अपनी कृपा दृष्टि बनाये रखना’’