
मायावी शक्तियों के बारे में बहुत से किस्से कहानियां सुनी होंगी, जो सच के करीब लगती हैं और सच जैसी भी। रामायण में मेघनाथ के मायावी युद्ध के बारे में बहुत चर्चा है कि वह बहुत ही तरीकों से अपना आकार-प्रकार बदल कर युद्ध कौशल में जीत जाता था। मारीच का मायावी रूप मृग बना। देव-दानवों के बीच मायावी युद्ध के अनेकों प्रसंग हैं। ये मायावी कैसा होता होगा, जो पकड़ में नहीं आता था? जब पकड़ में आता था, तब तक बहुत नुकसान उसके द्वारा कर दिया जाता। वर्तमान के कोरोना हमले से इसे समझा जा सकता है। पूरी दुनिया जान चुकी है कि एक वायरस के मायावी रूप ने सबको दुःखी कर दिया है। कोरोना के वर्तमान हमले पर इतना भर मालूम है कि वह मानव जाति की उर्जाशक्ति को क्षीण कर फेफड़ों में असर करता है। सांस का आना-जाना हमारा जीवन है और कोरोना बुखार, सरदर्द, बदनदर्द, खंरास, पेटपीड़ किसी भी रूप में शरीर पर हमला कर नुकसान पहुंचा रहा है। इसके मायावी हमले में चिकित्सा विज्ञानी दिन-रात एक किए हुए हैं और हर सम्भव प्रयास किये जा रहे हैं कि इसे बेअसर किया जाए लेकिन जिस रफ्रतार से इस मायावी ने चारों ओर क्रूरता दिखाई है, उसकी भरपाई करने में समय लग ही जायेगा।
कोरोना की दूसरी लहर में जिस तरह से नुकसान हुआ है उससे समाज हिल उठा है। जाने-अनजाने लोगों को इसका ग्रास बनना पड़ा है, लोगों का सुख-चैन इसने छीना है। इससे लड़ने और बचने के लिये बाजार सूने हो चुके हैं और व्यवस्था बनाने के लिये जुटी मशीनरी भी परेशान हो उठी है। जिस कारण से कई बार सरकार द्वारा लिये जा रहे फैसलों को पलटा जा रहा है। शासन-प्रशासन बार-बार यह देख रहा है कि कब कफ्रर्यू लगाये, कब बाजार बन्द के निर्देश दे, कब कार्यालयों को बन्द कराए या खुलवाए, बैंक-पोस्ट आपिफस का समय कितना रखे, स्कूलों के लिये क्या तय करे, बाहर से आने वालों पर क्या पाबंदी लगाये………….। वाकेई स्थिति संभालना बहुत कठिन है। सोशल मीडिया पर अपने तर्क देकर अफरा-तफर मचाने के बजाए स्थिति की नाजुकता को समझना चाहिये। तर्क और अपनी जिद छोड़ इस समय बचाव के रास्ते अपनाना सबकी प्राथमिकता होनी चाहिये। हालातों को देख लोग स्वयं ही ही सिमट भी चुके हैं। कहने की जरूरत ही नहीं है अब बाजार भी अपने आप से बन्द हैं। हालातों को देख देहरादून, हल्द्वानी समेत बड़े शहरों में अस्थाई अस्पताल और अस्थाई श्मशान घाट बना दिये गये हैं। मरीजों की संख्या को देखते हुए आॅक्सीजन पाइप लाइन तक बिछा दी गई हैं। मुख्यमंत्री ने विधायक निधि से अपने क्षेत्रों में कोविड रोकथाम सम्बन्धी व्यवस्थाओं पर एक करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी है। राज्य और जिला कंट्रोल रूम स्थापित किये गये हैं जो हालातों पर लगातार नज़र रखे हुए हैं। आयुष मंत्राी डाॅ. हरक सिंह के निर्देश के बाद इनमें होम्योपैथिक डाक्टरों को सेवाओं के लिये तैनात किया गया है। ऐसे में कर्मचारियों व डाक्टरों की छुट्टी रद्द कर दी गई हैं। प्रदेश में 108 आपातकालीन सेवा के बेड़े में 132 नई एम्बुलेंस शामिल हो चुकी हैं। इन्हें सभी जनपदों में दिया गया है। तमाम इन्तजामों के बीच कालाबाजारी करने वाले भी सक्रिय हैं। फल-सब्जी के मनमाने रेट बताने वालों से लेकर यात्रा-भाड़ा के भी बेरहम वसूलने वाले बेशर्म हो चुके हैं। इस प्रकार की शिकायतों पर कार्रवाई भी हुई है। बागेश्वर के काण्डा में टैक्सी चालकों को अधिक राशि वसूली पर पफटकार पड़ी और चालान हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दवाओं और जरूरी चीजों में खुली लूट को रोकने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार को जमाखोरों पर लगाम लगानी चाहिये। आम जनता को अपना घर चलाना, रोजी-रोटी की मुश्किल हो रही है।
हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में अतिरिक्त दबाव बना हुआ है। कोरोना या अन्य बीमारी से हुई मौतों के बाद कई बार तीमारदारों द्वारा हंगामा भी कर दिया गया है। दरअसल सारे इन्तजामों के बाद भी बहुत कुछ कमी हमारे सिस्टम में है। सुशीला तिवारी के डाक्टर बेचारे भी अकेले क्या कर सकते हैं। अस्पताल स्टाफ दिन-रात काम करने के बाद तनाव में घिर जाता है जब भीड़ बढ़ती है और कोरोना से संक्रमण काल में बचाओ- बचाओ हाय-हाय हो रही है।
बेकाबू कोरोना की लहर में देहरादून जिला सर्वाधिक प्रभावित है। जिले के सभी सरकारी अस्पतालों सहित हरिद्वार, रुड़की में संक्रमित भर चुके हैं। हाईकोर्ट नैनीताल ने भी हालातों पर निर्देश दिये हैं कि आशा वर्कर व एनजीओ के जरिए संक्रमित क्षेत्रों को चिह्नित करें। होम आइसोलेशन टेस्ट बढ़ाने के लिेय कहा है। गरीबों को जन आरोग्य व अन्त्योदय योजना के तहत हेल्थ कार्ड शीघ्र उपलब्ध् कराने के निर्देश भी हैं। अधिवक्ता दुष्यन्त मैनाली व दून निवासी सच्चिदानन्द डबराल ने क्वारंटीन सेन्टरों व कोविड अस्पतालों की बदहाली, प्रवासियों की मदद और उन्हें स्वास्थ्य सुविध उपलब्ध् कराने को लेकर जनहित याचिकाएं दायर की थीं।
इस समय यात्राएं भी थम चुकी हैं। ऐसे में में रेलवे ने देहरादून-काठगोदाम जनशताब्दी को अनिश्चितकाल के लिये निरस्त कर दिया है। यात्रियों की कम संख्या को देखते हुए यह निर्णय हुआ है।
कोरोना काल की विकराल स्थिति में नेतागण एक-दूसरे पर बरस रहे हैं। भाजपा के मंत्राीगण दवा आक्सीजन भरपूर होने का दावा कर रहे हैं। सरकार की ओर से बेहतर चिकित्सा सुविधा की बात कही जा रही है। नेता प्रतिपक्ष डाॅ. इन्दिरा हृदयेश ने अव्यवस्थाओं की ओर मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट किया है। आम आदमी पार्टी का कहना है सरकार महामारी से निपटने में विफल रही है। व्यवस्थाएं बढ़ाई जानी चाहिये।
