हिमवंत कवि चन्द्र कुंवर बरतवाल जन्म शताब्दी

रुद्रप्रयाग। प्रतिकूल परिस्थितियों में हिन्दी जगत को विशाल काव्य भण्डार देने वाले हिमवंत कवि चन्द्र कुँवर बत्र्वाल का जन्म शताब्दी समारोह धूमधाम से मनाया गया। हरिदत्त बेंजवाल राजकीय आर्दश इण्टर कालेज अगस्त्यमुनि में चन्द्र कुँवर बत्र्वाल स्मृति शोध् संस्थान द्वारा मुख्य समारोह आयोजित किया।
रुद्रप्रयाग जिले के तल्ला नागपुर पट्टी के प्रसिद्ध मालकोटी गाँव में 20 अगस्त 1919 को भोपाल सिंह एवं श्रीमती जानकी देवी के घर में चन्द्र कुँवर बत्र्वाल का जन्म हुआ था। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा उडामांडा प्राथमिक स्कूल और मिडिल शिक्षा नागनाथ पोखरी से हुई। बाद में पौड़ी, देहरादून और इलाहाबाद से उच्चशिक्षा प्राप्त की। उनकी प्रसिद्ध कृतियां हैं- नंदिनी, पयस्विनी, विराट ज्योति, हिमतंत का एक कवि, काफल पाक्कू, हिरण्यगर्भ, गीत माधवी, साकेत, उदय के द्वारों पर, प्रणयनी, हिम ज्योत्सना। उनके मित्रा शम्भू प्रसाद बहुगुणा ने उनकी विलुप्त हो रही रचनाओं को प्रकाशित किया। तभी से काव्य जगत में चन्द्र कुँवर बत्र्वाल का दूसरा नाम हिमतंत कवि प्रसिद्ध हुआ।
जन्मशताब्दी समारोह के मुख्य अतिथि रा.स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो.जी.एस.रजवार, विशिष्ट अतिथि वयोवृद्ध साहित्यकार योगम्बर बत्र्वाल थे जबकि अध्यक्षता नगर पंचायत अगस्त्य मुनि के अध्यक्ष अरूणा बेंजवाल ने की। कवि स्मृतियों को सांझा करते हुए डाॅ.योगम्बर बत्र्वाल ने कहा कि चन्द्र कुँवर आमजन का कवि मानकर जीने वाले आज भी हैं, इसलिये बिना किसी विभेद के जगह-जगह उन्हें याद किये जाने का सिलसिला चल पड़ा है।
आयोजन के दूसरे  सत्र का आयोजन राजकीय महाविद्यालय के सभागार में हुआ। हिन्दी साहित्य अकादमी नई दिल्ली के तत्वावधान में राज्य और देशभर से विद्वतजनों ने इसमें भागीदारी की। इस वर्ष का चन्द्र कुँवर बत्र्वाल स्मृति सम्मान प्रतिष्ठित साहित्यकार कुमाउनी भाषा पत्रिका दुदबोली के सम्पादक मथुरादत्त मठपाल को दिया गया। उनके सुपुत्र नवेन्दु मठपाल आयोजन में पधारे थे। आयोजन में प्रतिष्ठित पोस्टर चित्र कविता के चर्चित स्व.बी.मोहन नेगी के चित्रों की प्रदर्शन आकर्षण का केन्द्र थी। खुशी हुई कि उनके दो पुत्रों ने नेगी जी की परम्परा को बनाए रखा।