
कार्यालय प्रतिनिध्
पर्यटन नगरी नैनीताल में बढ़ता जा रहा दबाव और चल रही नीति-रीति से अजब हाल हो चुका है। गर्मियों में यहाँ का ताल सूखने लगा है और बरसात में अगल-बगल टूटने लगा है। देशी-विदेशी पर्यटकों की पसंदीदा जगह सरोेवर नगरी नैनीताल की रोजी-रोटी होटल उद्योग है। ऐसे में यहाँ के बाशिन्दों के अलावा बाहर से आकर कापफी संख्या में लोग रहने लगे हैं। बड़ा पैसा, बड़ा दीमाग, बड़ी पहँुच वालों ने उँफची पहाड़ियों से लेकर झील के पास तक साम्राज्य पफैला लिया जबकि पार्किंग के लिये यह पहाड़ी स्टेशन बेचैन है। नैनीताल बचाओ, इसका पर्यावरण बचाओ के नाम पर बहुत नारे लग चुके हैं लेकिन मनमापिफक सजावट पसन्द लोगों ने रातों रात कंक्रीट के ढेर लगा लिये जबकि अपनी ही जमीन पर अपना घंरौदा बनाने के लिये नियम पसन्द लोग परेशान हो चुके हैं। पीढ़ियों से नैनीताल रहने वाले चाह कर भी अपने मकान को न तो सजा पा रहे हैं और न बना पा रहे हैं जबकि नियम का पेंच लगाने वाले यह नहीं बता पा रहे हैं कि वह जिस स्थान पर बैठे हैं वहाँ किस नियम के तहत निर्माण कार्य या सजाया गया था। नैनीताल में लोअर माल रोड ध्ंसने लगी है। ऐसे में मान लिया जाता है कि शहर में बहुत दबाव है और निर्माण कार्यों को रोक कर सबकुछ ठीक कर लिया जायेगा। हाईकोर्ट ने भी झील के दो किलोमीटर के दायरे में निर्माण कार्यों पर रोक की बात कही। बाद में बात-बहस के बाद इस मामले में विचार हुआ। एनओसी लेकर अपनी जमीन पर अपना निर्माण करने वाले अभी तक भटक रहे हैं। दूसरी ओर झील को मजबूती देने के लिये हुए निर्माण कार्य की पोल खुल चुकी है। बार-बार लगाये जा रहे बजरी- सीमेंट का कोई असर नहीं है और सड़क का 25 मीटर भाग टूट कर नैनी झील में समा गया। ऐसे में अपर मालरोड से डिवाइडर लगाकर वाहनों का संचालन किया गया है। इसी समय 25 मीटर और हिस्सा में दरार आ गई।
इस बीच हाईकोर्ट के अनुपालन में नगर पालिका ने चाट पार्क व भोटिया मार्केट चार दर्जन दुकानों के अतिक्रमण हटाये। 36 दुकानों की झाप हटाने के अलावा 16 दुकानों के अतिरिक्त निर्माण को ध्वस्त किया गया। कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद प्रशासन हरकत में है और हाईकोर्ट के खिलापफ नारेबाजी करने वाले व्यापारियों ने क्षमा मांगी।
बहुत ही सीध्ी सी बात है कि चाट हो या चाकलेट, खिलौने हों या कपड़े की दुकान…..सभी ने अपनी जगह तलाशनी है। जिस जगह पर्यटकों की भीड़ और बिक्री की सम्भावना हो वहाँ दुकान जरूर सजेगी। यह बात दूसरी है कि कौन अपनी जगह पर दुकान सजाता है और कौन किराये पर या अतिक्रमण कर। चूंकि नैनीताल में हाईकोट है और न्यायमूर्ति सहित तमाम छोटे-बड़े अध्किारी यहाँ होते हैं। ऐसे में घिचपिच नैनीताल से होकर जाने में यदि इन्हें असुविध हुई तो सख्ती तो होगी ही। पिफर हाईकोर्ट के खिलापफ बोलना तो बहुत ही गलत हो जायेगा। यही सब हो रहा है इस नैनीताल में। यहाँ तक कि हाईकोर्ट को नैनीताल में पसन्द करने वाले भी चाहने लगे हैं कि यह किसी दूसरी जगह चला जाता। चारों ओर से डण्डे बरसने जैसा हो गया है इस सरोवर नगरी में। अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है, यहाँ के बाशिन्दों को एकजुट होकर न्यायालय का सम्मान करते हुए रास्ता तलाशना चाहिये। आंखिर नैनीताल की रंगत कुछ और ही ठैरी। इसे खूब सजाओ, खूब संवारो। पर्यावरण का ध्यान रखो, अतिक्रमण मत होने दो, जबरन के निर्माणों से बचो। नहीं तो क्याप्प से क्याप्प हो जायेगा।
