दीर्घकालीन वर्षा जल संरक्षण हेतु वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता

पि.हि. प्रतिनिध्
मुनस्यारी। जोहार शौका वरिष्ठ नागरिक संगठन देहरादून व मल्ला जोहार विकास समिति द्वारा ग्रीष्मकालीन आयोजनों के दौरान दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। जिसके मुख्य अतिथि केन्द्रीय राज्य मंत्राी अजय टम्टा थे। आयोजन का शुभारम्भ करने मुख्यमंत्राी त्रिवेन्द्र रावत को आना था लेकिन उनके स्थान पर श्री अजय टम्टा पहँुचे थे। संगठन के अध्यक्ष डाॅ.भगत सिंह बरपफाल ने आयोजन समिति की ओर से सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि दीर्घकालीन जल संरक्षण हेतु वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता है। इसके अन्तर्गत सभी मुख्य तथा उप जलधराओं के जल प्रवाह निर्वहन का दीर्घकालीन अध्ययन ;कार्यवाही- जल संस्थान एवं जल निगमद्ध, लम्बी अवध् ितक जलवायु मापन के डाटा ;कार्यवाही- जलवायु विज्ञान निदेशालयद्ध, भू-भौतिकीय अध्ययन ;कार्यवाही- वाडिया संस्थान आपफ हिमालयन जियोलोजीद्ध, भू-गर्भीय जल विज्ञान का अध्ययन ;कार्यवाही- उत्तराखण्ड अन्तरिक्ष उपयोग केन्द्रद्ध, वन जल विज्ञान का अध्ययन ;कार्यवाही- राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्था रुड़कीद्ध जरूरी है।
उल्लेखनीय है कि सीमान्त क्षेत्रा मुनस्यारी के जल व जैवविविध्ता को ध्यान में रखते हुए जोहार शौका वरिष्ठ नागरिक समिति ने एक रूपरेखा बनाई और इस बार कार्यशाला का आयोजन करते हुए चाहा है कि इस दिशा में ठोस कार्य हो ताकि जल और जैवविविध्ता की दिशा में वैज्ञानिक विध् िसे कार्य होने के साथ ही इसका सभी को लाभ हो।
भौगोलिक दृष्टिकोण से मुनस्यारी एक अन्तन्त दुर्गम एवं दूरस्थ क्षेत्रा में चीन/तिब्बत सीमा पर स्थित है। वर्ष 196. के आसपास भारत-तिब्बत व्यापार बन्द होने के बाद मुनस्यारी एवं मल्ला जोहार का क्षेत्रा अपने असतित्व को बनाए रखने के लिये अनेक समस्याओं से जूझ रहा है। जिनमें वन एवं जैव- विविध्ता में त्वरित गति ऐ हो रहे ह्रास, निरन्तर बढ़ रही जल संकट, जीवन-यापन के लिये संसाध्न एवं रोजगार की कमी, यातायात सुविध की चिन्ताजनक स्थिति, समुचित एवं उचित स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव, शिक्षा के स्तर में गिरावट आदि मुख्य है। इन्हीं कारणों से इस क्षेत्रा से ध्ीरे-ध्ीरे पलायन हो रहा है और कई गाँव या तो खाली हो गए हैं या पिफर उनमें बहुत ही कम परिवार रह गए हैं।
चीन/तिब्बत सीमा पर बसे सामरिक दृष्टिकोण से अत्यन्त महत्वपूर्ण मुनस्यारी एवं मल्ला जोहार क्षेत्रा से पलायन रोकने व पुनर्वास करने के लिये यह आवश्यक है कि इस क्षेत्रा का पर्यावरण संरक्षण के साथ दीर्घकालीन सर्वांगीण एवं सतत विकास की रूपरेखा बने और पिफर उसी के अनुरूप विकास के कार्य अमल में लाये जाएं। इसी उद्देश्य से स्थानीय लोगों की सहभागिता से यह कार्यशाला आयोजित की गई। जिसका विषय- ‘ मुनस्यारी क्षेत्रा के जल स्रोतों एवं जैवविविध्ता के संरक्षण के परिप्र्रेक्ष्य में भू-गर्भीय पर्यावरण तथा वन-जल विज्ञान की भूमिका’ है।
जोहार शौका वरिष्ठ नागरिक संगठन देहरादून द्वारा मल्ला जोहार विकास समिति मुनस्यारी एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मुनस्यारी पूर्व स्टूडेंट्स ऐसोसिएशन की सहभागिता से आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े दो सौ लोगों ने प्रतिभाग किया।
पिघलता हिमालय 18 जून 2018 के अंक में प्रकाशित रपट

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